IUC क्‍या है यह किस तरह काम करता है?

आप सभी इस समय IUC से जुड़े विवाद के बारे में न्‍यूज पेपर, टीवी और ऑनलाइन वेब पोर्टल में पढ़ और देख रहे होंगे। पर शायद आप में से कुछ लोग ही आयूसी के बारे में जानते हैं। सभी टेलीकॉम कंपनियों का एक ऑफिसियल स्‍थान Trai (टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया) द्वारा पिछले दिनों IUC में भारी कटौती की घोषणा की गई है जिसके बाद से विवाद और बढ़ गया है। टेलीकॉम कंपनियों द्वारा यह आरोप लगाया जा रहा है कि Trai ने जियो को फायदा पहुंचाने के उद्देश्‍य से यह फैसला लिया है।

आखिर आईयूसी का विवाद क्‍या है और इसका असर आप पर कैसे पड़ सकता है इन सब चीजों के बारे में यहां पर बताएंगे-

क्‍या है आईयूसी

क्‍या है आईयूसी

इंटरकंनेक्‍शन यूसेज चार्ज (IUC) वह फीस होती है, जिसे टेलिकॉम कंपनियां उस दूसरी कंपनी को देती हैं, जिसके नेटवर्क पर कॉल खत्‍म होता है। उदाहरण के तौर पर आप वोडाफोन के ग्राहक हैं और आपका दोस्‍त टाटा डोकोमो का उपभोक्‍ता है। जब आप अपने दोस्‍त को कॉल करेंगे तो आपका ऑपरेटर वोडाफोन, टाटा डोकोमो को प्रति मिनट शुल्‍क अदा करेगा।

ये है ट्राई का फैसला

ये है ट्राई का फैसला

ट्राई ने इसी मंगलवार को IUC में भारी कटौती की है। 1 अक्‍टूबर से 14 पैसे प्रति मिनट की बजाय यह सिर्फ 6 पैसे प्रति मिनट चार्ज किया जाएगा। इसके अलावा 1 जनवरी 2020 से इसे पूरी तरह खत्‍म कर दिया जाएगा।

ये है विवाद

ये है विवाद

रिलायंस जियो लगातार IUC को खत्‍म करने की मांग कर रहा था, लेकिन एयरटेल, वोडाफोन, आइडिया जैसी दूसरी कंपनियां इसमें वृद्धि की मांग कर रही थीं। ट्राई के ताजा फैसले को रिलायंस के पक्ष में बताया जा रहा है। दूसरी कंपनियों की आमदनी पर इसका बुरा असर पड़ सकता है। इसलिए कंपनियां इसका विरोध कर रही हैं।

आपका क्‍या फायदा और नुकसान होगा इससे

आपका क्‍या फायदा और नुकसान होगा इससे

माना जा रहा है कि IUC में कटौती से कॉल दरें और भी सस्‍ती हो सकती हैं। अगले महीने से इसकी शुरुआत हो सकती है। कुछ जानकारों का यह भी मानना है कि कंपनियां IUC में कटौती से संभावित नुकसान की भरपाई के लिए कुछ नए तरीके निकाल सकती हैं, लेकिन जियो से प्रतिस्‍पर्धा की वजह से कंपनियां ग्राहकों पर कोई बोझ डालने से बचना चाहेंगी।

इस तरह होती गई IUC में कटौती

इस तरह होती गई IUC में कटौती

आईयूसी की शुरुआत 2003 में हुई थी जब इनकमिंग कॉल फ्री होने के बाद ट्राई ने कॉल करने वाले ऑपरेटर से भुगतान करने का नियम बनाया था। शुरुआत में इसकी दर 15 पैसे प्रति मिनट से 50 पैसे प्रति मिनट तक थी। यह दर दूरी पर आधारित होती थी। इसके अलावा 20 पैसे से लेकर 1.10 प्रति मिनट तक कैरिज चार्ज भी रखा गया था। ट्राई ने फरवरी 2004 में इस दर को घटाकर 20 पैसे प्रति मिनट किया और अंत में 1 मार्च 2015 को इस दर को 14 पैसे प्रति मिनट कर दिया गया।

कोई हुआ खुश तो कोई निराश

कोई हुआ खुश तो कोई निराश

भारती एयरटेल ने इसे इंडस्‍ट्री के लिए 'बेहद निराशाजनक निर्णय' बताया। एयरटेल ने कहा, हम नए नियम से काफी दुखी हैं, वह भी ऐसे वक्‍त में जब उद्योग भारी वित्‍तीय मुश्किलों का सामना कर रहा है। वोडाफोन और आइडिया ने भी ट्राई के फैसले पर निराशा जताई है। वोडाफोन ने कहा कि इससे सिर्फ नई कंपनी को फायदा होगा। रिलायंस जियो के लिए जरुर यह फैसला खुशियां लेकर आया है।

शेयर भी लुढ़के

शेयर भी लुढ़के

TRAI के इस फैसले के बाद दूरसंचार क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों के शेयरों में गिरावट रही। आइडिया, रिलायंस कम्‍यूनिकेशन और टाटा टेलिसर्विसेज के शेयर 3.43 प्रतिशत तक लुढ़क गए। हालांकि, भारतीय एयरटेल शुरुआती गिरावट से उबरकर 0.39 प्रतिशत की तेजी में रही।

कंपनियों के पास क्‍या है विकल्‍प

कंपनियों के पास क्‍या है विकल्‍प

ट्राई के इस फैसले के बाद अधिकतर दूरसंचार कंपनियों ने इसकी आलोचना की है और इसे कानूनी चुनौती देने का फैसला किया है। IUC में कटौती से पैदा हुए विवाद पर वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि नियामक ने अपने विचार दे दिए हैं और यह संबंधित कंपनियों पर है कि अपने लिए इसके उपायों का पता लगाएं।

ट्राई ने क्‍या कहा

ट्राई ने क्‍या कहा

ट्राई के चेयरमैन ने मोबाइल IUC में कटौती के अपने फैसले में अपारदर्शिता के अरोपों को खारिज करते हुए कहा कि लागत की गणना वस्‍तुनिष्‍ठ और वैज्ञानिक तरीके से की गई, जिसमें किसी कंपनी विशेष की मदद करने या नुकसान पहुंचाने का सवाल ही नहीं उठता।

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