दिल्ली-UP में सोने (GOLD) के दाम में बंपर गिरावट, देखें अपने शहर में सोन-चांदी के दाम

उत्तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ में सोने के दाम में 1,000 से 1,090 रुपए तक की बड़ी गिरावट देखी गई है वहीं जयपुर में सोने के दाम में 1,000 रुपए की गिरावट दर्ज की गई है।

भारत में सोने के दाम फिर गिर गए हैं। देश भर के सर्राफा बाजार में सोने के दाम में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। ये गिरावट 260 रुपए से लेकर 270 रुपए तक हुई है। दिल्ली में सोने दाम में 260 रुपए से लेकर 270 रुपए तक की गिरावट देखी गई है वहीं मुंबई में 10 रुपए से लेकर 11 रुपए तक की मामूली गिरावट दर्ज की है। बात अगर उत्तर भारतीय राज्यों की करें तो उत्तरप्रदेश की राजधानी लखनऊ में सोने के दाम में 1,000 से 1,090 रुपए तक की बड़ी गिरावट देखी गई है वहीं जयपुर में सोने के दाम में 1,000 रुपए की गिरावट दर्ज की गई है। दिल्ली सर्राफा बाजार में सोने की कीमत में 250 रुपए की गिरावट दर्ज की गई है। जबकि मुंबई में करीब 50 रुपए की मामूली गिरावट देखी गई है। दिल्ली सर्राफा बाजार में 22 कैरेट सोने की कीमत 27,300 रुपए प्रति 10 ग्राम है जबकि 24 कैरेट सोने की कीमत 29,781 रुपए प्रति 10 ग्राम है। वहीं मुंबई में 22 कैरेट सोने की कीमत 27,550 रुपए प्रति 10 ग्राम है जबकि 24 कैरेट सोने की कीमत 30,054 रुपए प्रति 10 ग्राम है। आगे देखिए देश बड़े शहरों में सोने की कीमत।

देखें अपने शहर में सोने-चांदी के दाम

देखें अपने शहर में सोने-चांदी के दाम

 

देश के 24 बड़े शहरों में सोने के दाम देखने के लिए यहां क्लिक करें, इसके साथ ही चांदी के दाम देखने के लिए यहां क्लिक करें।

सोने-चांदी के रेट बाजार पर निर्भर हैं, इसलिए दिए गए आंकड़े और वर्तमान में बाजार में सोने के दाम में फर्क हो सकता है।

कैसे तय होती है भारत में सोने की कीमत

कैसे तय होती है भारत में सोने की कीमत

यदि आप भारत में सोने के दामों पर गौर करेंगे तो आप पाएंगे कि देश के हर शहर में सोने के भाव अलग-अलग हैं। कई शहरों में सोना महंगा होता है तो कई शहरों में सस्ता। तो भारत में सोने के भाव आखिर कैसे तय होतें हैं। भारत के शहरों में सोने के भाव अंतरराष्ट्रीय भावों पर निर्भर करते हैं। इसलिए जब सोने के अंतरराष्ट्रीय भाव बढ़ते हैं तो कई शहरों में ज़्यादा महंगा सोना पड़ता है। हमारे यहां सोने की खानें ज़्यादा नहीं है हमें अपनी ज़रूरत का सोना आयात करना पड़ता है। भारत में सरकारी और निजी बैंक सोना आयात करते हैं , साथ ही कुछ एजेंसीज भी हैं जो कि विदेश से सोना खरीदकर डीलर्स को भेजती हैं। आयात करने वालों की ये सूची बदलती रहती है और सरकार इसमें बदलाव करती रहती है।

भारत में सोना कौन लाता है?

भारत में सोना कौन लाता है?

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ोदा, मिनरल और मेटल ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन, यूनियन बैंक, सिंडीकेट बैंक आदि सोने के आयातक हैं। भारत में 38 बैंक हैं जो सोना बाहर से खरीदते हैं। बाद में ये बैंक सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमत का हिसाब लगाकर उसे भारत की मुद्रा में बदलते हैं फिर उस पर आयात शुल्क लगा देते हैं। इस तरह इसका भारत में सोने का भाव तय होता है। मगर ये अंतिम खुदरा भाव नहीं है, सोने कीमतें शहरों के बुलियन एसोसिएशन द्वारा निर्धारित होती है, जैसे कि मुंबई। उदाहरण के लिए मुंबई में आईबीजेए (इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन), सोने का डीलर्स का एक एसोसिएशन हैं जहां उनके द्वारा कीमतें निर्धारित होती हैं बाद में इन्हें रिटेलर्स तक भेज दिया जाता है। इसके बाद रेट को पूरी तरह निर्धारित करने के लिए ये बड़े डीलर्स से संपर्क करते हैं और भविष्य की कीमतें तय करते हैं।

सोने का दाम तय करने की प्रक्रिया

सोने का दाम तय करने की प्रक्रिया

सोने के भाव तय करने के अन्य तरीके भी हैं। आप सोने के अंतरराष्ट्रीय भाव लेकर उसमें डॉलर के मुक़ाबले रुपए की कीमत को गुणा कर सकते हैं। बैंक सोना आयात, वैट, ओक्ट्रोई और लोकल खर्चे निकालकर इससे मुनाफा करते हैं। इसलिए, एक ज्वेलर की दुकान पर आप जो भुगतान करते हैं उसमें घड़ाई के चार्जेज(मेंकिंग चार्ज) के साथ ये सब चीजें भी जुड़ी होती हैं।

भारत में सोने के दाम अलग-अलग शहरों में अलग-अलग क्यों होते हैं

भारत में सोने के दाम अलग-अलग शहरों में अलग-अलग क्यों होते हैं

अलग-अलग राज्यों में सोने के भाव अलग-अलग होते हैं। कुछ राज्यों में ट्रांसपोर्ट कोस्ट या परिवहन लागत ज़्यादा होती है। कुछ लोग मानते हैं कि मुंबई, चेन्नई और कोलकाता जैसे शहरों में सोने के भाव कम होते हैं क्यों कि यहां के बन्दरगाहों सोना सीधा पहुंचता है और अन्य लागतें बच जाती हैं। केवल ये ही कारण नहीं है कुछ अन्य कारण भी शहरों में सोने के इन भावों को प्रभावित करते हैं।

डॉलर से कैसे प्रभावित होती है सोने की कीमतें

डॉलर से कैसे प्रभावित होती है सोने की कीमतें

सोने के भाव तय करने में करेंसी भी महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है। उदाहरण के लिए, जैसे हमें सोना आयात करना होता है और इसका भुगतान डॉलर में करना होता है। अब यदि रुपए की कीमत डॉलर के मुक़ाबले 67 या 68 रुपए तक गिर जाती है तो हमें सोने के लिए 1 रुपया ज़्यादा देना पड़ेगा। जितना ज़्यादा सोना आयात किया जाएगा विदेशी विनिमय यानि फ़ोरेन एक्स्चेंज रिज़र्व भी देश में उतना ही ज़्यादा फ़्लो करेगा।

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