अगर आप भी म्यूचुअल फंड में निवेश करना चाहते हैं तो आपको कुछ जरूरी बातें पहले जान लेनी चाहिए।
आज के दौर में म्यूचुअल फंड्स में पैसा निवेश करना एक फैशन सा बन गया। अधिकतर युवा और नौकरीपेशा लोग सिर्फ विज्ञापनों के झांसे में आकर म्यूचुअल फंड में निवेश कर रहे हैं। हालांकि म्यूचुअल फंड में निवेश करना बहुत अच्छी बात है लेकिन निवेश को लेकर समझदारी भी उतनी ही जरूरी है। अगर आप भी म्यूचुअल फंड में निवेश करना चाहते हैं तो आपको कुछ जरूरी बातें पहले जान लेनी चाहिए।
म्यूचुअल फंड को समझें
बाजार में तमाम म्यूचुअल फंड स्कीम मौजूद हैं। यहां आपको एक बात समझनी होगी कि म्यूचुअल फंड के जरिए सिर्फ शेयर बाजार या इक्विटी में ही पैसा नहीं लगाया जाता है बल्कि इसके जरिए, गोल्ड और कमोडिटी बाजार में भी निवेश किया जा सकता है। अब सबसे बड़ा सवाल आपके सामने ये है कि आप म्यूचुअल फंड में कैसे निवेश करना चाहते हैं। क्या आपको शॉर्ट टर्म निवेश करना है या लॉन्ग टर्म निवेश। यहां हम म्यूचुअल फंड को लेकर कुछ जरूरी बातों की जानकारी आपको देंगे जिससे आपको निवेश में आसानी हो।
पहले तय करें अवधि
म्यूचुअल फंड में निवेश करने से पहले आप इस बात की प्लानिंग कर लीजिए कि आपको छोटी अवधि का निवेश करना है या फिर लंबी अवधि का। अगर आपको साल से 2 साल के लिए म्यूचुअल फंड में निवेश करना है तो उसके लिए आपके निवेश प्लानिंग अलग होगी। वहीं 5 से 10 साल के लिए यदि आप निवेश करना चाहते हैं तो उसके लिए अलग निवेश प्लान होंगे। उदाहरण के लिए यदि आप छोटी अवधि का निवेश कर रहे हैं तो आप डेट फंड या लिक्विड फंड चुन सकते हैं वहीं अगर आप लंबी अवधि का निवेश कर रहे हैं तो आपके लिए इक्विटी म्यूचुअल फंड सही रहेगा।
निडर होकर करें निवेश, जोखिम लेनें की क्षमता रखें
अगर आप जोखिम लेने की क्षमता रखते हैं और आपको बाजार की अच्छी जानकारी है तो इसका अर्थ है कि आप म्यूचुअल फंज में निवेश करने के लिए तैयार हैं। एक बार म्यूचुअल फंड की अवधि तय होने के बाद आप खुध इस बात की समीक्षा करिए कि आप कितना जोखिम उठा सकते हैं। ये बात जरूर ध्यान रखें कि निवेश में सिर्फ रिटर्न ही नहीं जरूरी है बल्कि कैपिटल प्रोटेक्शन यानि कि जो पूंजी आपने निवेश में लगाई है उसकी भी सुरक्षा जरूरी है। उदाहरण के लिए आपने अलग लंबी अवधि के निवेश का प्लान बनाया है और आप इक्विटी में निवेश कर रहे हैं और आप नहीं चाहते कि आपके कैपिटल और रिटर्न में घाटा हो तो आपको ऐसे फंड चुनने होंगे जिसमें रिटर्न और जोखिम दोनों का संतुलन रहे।
फंड के बारे में पूरी जानकारी रखें
किसी भी फंड में निवेश से पहले आप उस फंड के बारे में पूरी जानकारी इकट्ठा करिए। फंड का पिछला प्रदर्शन यानि की रिकॉर्ड देखिए और जरूरी हो तो कम से कम फंड का पिछले 2-3 वर्ष का रिकॉर्ड जांचिए। इससे आपको फंड के उतार चढ़ाव के बारे में पता चलेगा। इसके अलावा एक मोटा अंदाजा आपको ये भी मिलेगा कि फंड के जरिए कितना रिटर्न मिल सकता है।
निवेश से जुड़े खर्च की गणना करें
किसी भी म्यूचुअल फंड को चुनते हुए आप निवेश से जुड़े खर्च का अध्ययन जरूर करें। इस बात को परखें कि निवेश से जुड़े खर्च कौन-कौन से हैं। ये जानना इस लिए जरूरी है क्योंकि इन खर्चों की वजह से आपका नेट रिटर्न कम हो सकता है। इसमें एंट्री एग्जिट लोड, एसेट मैनेजमेंट चार्ज और एक्सपेंश रेशियो जैसे खर्चे शामिल होते हैं। हालांकि म्यूचुअल फंड स्कीम में एंट्री लोड नहीं लगता है लेकिन तय समय से पहले म्यूचुअल फंड से पैसे निकालने पर कई कंपनियां एग्जिट चार्ज लगाती हैं। ये एग्जिट चार्ज 3% तक हो सकता है। इसलिए ऐसी स्कीम्स को चुनें जहां एग्जिट लोग कम हो या फिर न हो।
फंड हाउस और फंड मैनेजर का रिकॉर्ड चेक करें
ये पूरी तरह से अनुभव पर आधारित होता है। कोई भी फंड मैनेजर जो आपको पैसों को निवेश में लगा रहा है उसे कितने समय का अनुभव है क्या वह बाजार के उतार-चढ़ाव को समझता है या नहीं, ये सारी बातें आपको पहले से जान लेनी चाहिए।
रकम कोई भी हो निवेश जल्दी शुरु करिए
म्यूचुएल फंड के तीन मूल मंत्र हैं, पहला जल्दी निवेश या कम उम्र में निवेश, दूसरा नियमित निवेश और तीसरा नियमित निवेश। ये तीन मंत्र आपको बेहतर लाभ दिलवाएंगे। आप म्यूचुअल फंड में 500 रुपए की छोटी राशि से भी निवेश की शुरुआत कर सकते हैं। हालांकि इस बात का जरूर ध्यान रखें कि म्यूचुअल फंड में निवेश बाजार के रिस्क पर निर्भर करता है इसलिए इसके बारे में किसी विशेषज्ञ से सलाह लेकर निवेश की तैयारी करें।
Hindi.goodreturns.in का मकसद है कि हमारे पाठकों को व्यापार, निवेश, बचत और टैक्स जैसी बातों के बारे सही में जानकारी मिले। यह लेख सिर्फ म्यूचुअल फंड को लेकर आपकी जानकारी के लिए लिखा गया है। आपके निवेश में किसी तरह के होने वाले हानि या फिर लाभ के लिए संस्थान उत्तरदायी नहीं होगा।


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