यदि ग्राहक बैंक की शाखा के आस-पास 20 मीटर के दायरे में दिखता है तो उससे हर बार 20 रुपए बतौर बैंक सेवा शुल्क लिया जाएगा!
एक नए सर्कुलर के अनुसार यदि कोई एसबीआई ग्राहक SBI बैंक या उसकी शाखा में एक दिन में दो बार से अधिक दिखता है या दाखिल होता है तो उससे 50 रुपए बतौर बैंक सेवा शुल्क लिया जाएगा, यदि ग्राहक बैंक की शाखा के आस-पास 20 मीटर के दायरे में दिखता है तो उससे हर बार 20 रुपए बतौर बैंक सेवा शुल्क लिया जाएगा इसके अलावा इस शुल्क के साथ सर्विस टैक्स भी अदा करना पड़ेगा और ग्राहक को एक कोरे कागज पर लिख कर देना पड़ेगा कि, 'कान पकड़ता हूं साहब अब कभी बैंक के आस-पास क्या दूर-दराज तक नजर नहीं आउंगा, और सपने में भी बैंक जाने के बारे में नहीं सोचुंगा।'
जब से निजी बैंकों और SBI ने ग्राहकों पर चार्जेस और फीस का बोझ लाद दिया है तब से लोगों के बीच एक चुटकुला चल रहा है। ये वही चुटकुला है जिसे अभी आपने उपर पढ़ा है। SBI या कोई भी बैंक इस तरह के चार्जेस नहीं लगा रहा है। पर बैंकों द्वारा अचानक ही लगाए गए चार्जेस से आम जनता या यूं कहें कि ग्राहक दुखी हैं। खैर ये तो हंसी-मजाक की बात हो गई। अब जरा कुछ काम की बातों से आपको रु-ब-रू करा दें। पीएम मोदी देश को कैशलेश इकोनॉमी बनाने पर जोर दे रहे हैं पर बैंक उनकी उम्मीदों पर पलीता लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। अगर बैंक ट्रांजेक्शन चार्जेज इतने ज्यादा लगाएंगे तो हो सकता है कि लोग एक ही बार में या फिर दिए गए तीन ट्रांजेक्शन्स में अपना पैसा निकाल लें और फिर कैश में खर्च करें। ऐसी स्थिति में कैशलेस के लिए किया गया सारा उपक्रम धरा का धरा रह जाएगा। हमें यह मानना पड़ेगा कि देश के अभी ज्यादातर हिस्से ऐसे हैं जहां कैशलेश लेन-देन नहीं हो रहा है। सिर्फ 3 महीने में देश में कैश-लेश को सभी क्षेत्रों में पहुंचाना आसान भी नहीं है फिर भी सरकार ने कई उपक्रम किए हैं जिससे लोग कैश-लेश के प्रति जागरुक हो सकें, लेकिन अब बैंको की मनमानी और बेहिसाब ट्रांजेक्शन चार्ज इस मुहिम के लिए बाधा बन चुके हैं। बैंक कैशलेश के लिए एमडीआर चार्जेस घटा नहीं रहे हैं, इंटरनेट बैंकिंग में IMPS और NEFT के चार्जेस कम नहीं कर रहे हैं। सिर्फ ICICI बैंक में IMPS और NEFT के चार्जेस नहीं लगते हैं। वहीं SBI में 10,000 रुपए के ट्रांसफर पर 2.5 रुपए और सर्विस चार्ज 10,000 से 1 लाख रुपए तक 5 रुपए और सर्विस चार्ज। अब तो आरबीआई ने और भी अतिरिक्त शुल्क लगा दिए हैं। आरबीआई ने मिनिमम बैलेंस का निर्धारण कर दिया है। मेट्रो शहरों में 5 हजार रुपए, शहरों में 3 हजार रुपए, अर्ध शहरी इलाकों में 2 हजार रुपए और ग्रामीण इलाकों में 1 हजार रुपए न्यूनतम बैलेंस रखना जरूरी होगा। अगर एसबीआई ग्राहक ये न्यूनतम बैलेंस नहीं रखता है तो उसके उपर जुर्माना लगेगा। वहीं निजी बैंक अपनी ही मनमानी कर रहे हैं। निजी बैंकों ICICI, HDFC और एक्सिस बैंक में सिर्फ तीन बार ही मुफ्त एटीएम से ट्रांजेक्शन की सुविधा है। इसके बाद हर ट्रांजेक्शन पर 150 रुपए और सर्विस चार्जेस अतिरिक्त लगेंगे। मतलब पूरी तरह से ग्राहक की जेब कटेगी। हाल ही में हुई नोटबंदी के बाद बैंकों के पास बहुत ज्यादा मात्रा में कैश आ चुका है। जिसके कारण बैंको ने होम लोन की ब्याज दरों में मामूली कटौती की थी, लेकिन अब बैंको के ये शुल्क अचानक ग्राहकों पर क्यों लगा दिए ये समझ से परे है। बैंकों के इस रवैये से लोगों में गुस्सा है, कुछ लोग तो यहां तक कह रहे हैं कि अगर बैंक खाते में कम बैलेंस होने पर कटौती कर रहे हैं तो उनके एटीएम में भी यदि पैसे नहीं है तो ग्राहकों को भी जुर्माना वसूलने की सुविधा होनी चाहिए, हालांकि ये बातें पूरी तरह से भावनात्मक हैं और इसके पीछे कोई तर्क नहीं है, फिर भी इस तरह के बयान लोगों के गुस्से को दर्शाने के लिए बहुत हैं। रविवार को केंद्र सरकार ने भी बैंको से अपील की, कि वह ग्राहकों पर लगाए गए चार्जेस पर फिर से विचार करें। इस पूरे मामले में आम जनता सीधे सरकार पर दोषारोपण कर रही है लेकिन सच्चाई यही है कि बैंक पूरी तरह से स्वायत्त हैं और उन पर RBI का नियंत्रण है। ऐसे में बैंको को ग्राहकों की भलाई के बारे में एक बार फिर से जरूर विचार करना चाहिए।
बैंक मस्त, जनता पस्त
कैसे कैशलेश बनेगा देश?
मोदी सरकार की मुहिम में बाधा बने बैंक
हर कदम पर शुल्क वसूली
मिनिमम बैलेंस जरूरी
मनमानी पर उतारू हैं बैंक
पैसा ग्राहकों का, मौज बैंकों की
ग्राहको में गुस्सा
सरकार की अपील


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