इस योजना के तहत देश के हर नागरिक को एक फिक्स पगार दी जाएगी, चाहे वो रोजगार से जुड़ा हो या बेरोजगार हो। केंद्र सरकार ने इस योजना को यूनिवर्सल बेसिक इनकम नाम दिया है।
केंद्र की मोदी सरकार देश से गरीबी और बेरोजगारी दूर करने के लिए तमाम योजनाएं शुरु कर रही है। अब मोदी सरकार एक नई योजना लोगों के लिए लेकर आ रही है। इस योजना के तहत देश के हर नागरिक को एक फिक्स पगार दी जाएगी, चाहे वो रोजगार से जुड़ा हो या बेरोजगार हो। केंद्र सरकार ने इस योजना को यूनिवर्सल बेसिक इनकम नाम दिया है।
बजट के दौरान हो सकता है एलान
सूत्रों के मुताबिक नोटबंदी के बाद मोदी सरकार देश भर के लोगों को यूनिवर्सल बेसिक इनकम योजना लागू करने जा रही है। मोदी सरकार के इस नियम के तहत देश के हर नागरिक को आमदनी के तौर पर एक तयशुदा रकम मिलेगी। समाचार पोर्टल नवभारत टाइम्स में सूत्रों के हवाले से प्रकाशित खबर के मुताबिक जल्द ही आर्थिक सर्वे और आम बजट के दौरान इसका एलान हो सकता है।
जरूरतमंदों के लिए है स्कीम
हालांकि कुछ लोगों का ये भी कहना है कि सबके लिए नहीं तो सरकार इस योजना को जरूरतमंदो के लिए जरूर लागू कर सकती है। जो लोग बेरोजगार हैं या जिनके पास कमाई का जरिया नहीं है मोदी सरकार उन लोगों के लिए यह स्कीम शुरु कर सकती है।
20 करोड़ लोगों को होगा फायदा
बताया जा रहा है कि इस योजना में शुरुआती दौर में हर 500 रुपए हर खाते में डालने की योजना है। इस योजना से देश के 20 करोड़ जरूरतमंदो को लाभ मिल सकता है।
लंदन विवि के प्रो ने तैयार की स्कीम
यह प्रस्ताव लंदन यूनिवर्सिटी के प्रफेसर गाय स्टैंडिंग ने तैयार किया है। जिनीवा से बातचीत में उन्होंने दावा किया कि मोदी सरकार से जुड़े एक जिम्मेदार शख्स ने कन्फर्म किया है कि बजट में इसका ऐलान मुमकिन है। प्रफेसर गाय ने संकेत दिया कि सरकार इसे फेज वाइज लागू कर सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार ने मध्य प्रदेश की एक पंचायत में पायलट प्रॉजेक्ट के तौर पर ऐसी स्कीम पर काम किया था, जहां बेहद साकारत्मक नतीजे आए थे।
सरकार के पास है पर्याप्त फंड
प्रो. गाय स्टैंडिंग का कहना है कि इस स्कीम को लागू करने के लिए मोदी सरकार के पास पर्याप्त फंड है। स्कीम को देश भर में लागू करने पर सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी का 3 से 4 फीसदी खर्चा आएगा। वहीं, मौजूदा समय में सरकार सब्सिडी पर जीडीपी का 4 से 5 फीसदी खर्च कर रही है। यह जरूर है कि इस योजना को शुरु करने के बाद विभिन्न सब्सिडियों को खत्म किया जा सकता है। प्रो. गाय स्टैंडिंग का कहना है कि सब्सिडी और अनुदान साथ-साथ नहीं चल सकते।
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