राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के अभिभाषण के बाद पिछले वित्तीय वर्ष का लेखा-जोखा पेश किया गया। सरकार ने अपना आर्थिक सर्वे सदन के पटल पर रखा। आर्थिक सर्वे पेश करते हुए वित्तमंत्री ने बताया कि 2016-17 के दौरान विकास दर 7.1 रहेगी जबकि 2017-18 के लिए विकासदर 6.50 से 7.50 तक रह सकती है।
7.5 फीसदी रह सकती है विकास दर
नोटबंदी से पहले वित्तवर्ष 2016-17 के लिए आर्थिक विकास दर का सरकारी अनुमान 7.1 फीसदी था। नोटबंदी के बाद IMF ने वर्ष 2016-17 के लिए इसे घटाकर 6.6 फीसदी कर दिया था वहीं 2017-18 के लिए 7.2 फीसदी विकास दर का अनुमान दिया है। पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने ताजा अनुमान जाहिर किया है कि अगले दो वित्त वर्ष के दौरान आर्थिक विकास दर 6.5 फीसदी तक रह सकती है।
वित्तमंत्री अरुण जेटली के बाद मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम ने भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर 3 चुनौतियों के बारे में जिक्र किया है।
नोटबंदी से उबरने की चुनौती
मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यम ने नोटबंदी के बाद होने वाले असर से उबरने के लिए अहम कदम उठाने की जरूरत पर जोर दिया है। उनके मुताबिक नोटबंदी के नजदीकी नुकसान देखने के बजाय उसके दूरगामी परिणामों को देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार जल्द से जल्द नोटबंदी से उबरने की प्रक्रिया को पूरा करेगी साथ ही रियल स्टेट को जीएसटी के दायरे में लाने की कोशिश करेगी।
ट्रंप का असर
अमेरिका के नए डोनाल्ड ट्रंप की अमेरिकी फर्स्ट की नीति से भारतीय चिंतित हैं। ट्रंप अमेरिका फर्स्ट, मेक इन अमेरिका और अमेरिकियों के लिए नौकरी जैसी संरक्षण की नीतियों को हवा दे रहे हैं, सर्वे में जिक्र किया गया है कि इसका नकारात्मक असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ने का खतरा है।
क्रूड ऑयल के दाम
आर्थिक सर्वे में भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने तीसरा सबसे बड़ा खतरा वैश्विक स्तर पर बढ़ते क्रूड ऑयल की कीमतों से है। गौरतलब है कि बीते तीन वर्षों के दौरान ग्लोबल क्रूड की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज हुई थी जिसका सीधा फायदा भारत जैसे विकासशील देश को सस्ते क्रूड के चलते देखने को मिला है।


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