विशेषज्ञों के मुताबिक जो लोग घर खरीदने का इंतजार कर रहे हैं उनके लिए आने वक्त में प्रॉपर्टी की दाम लगभग 30 फीसदी तक गिर सकते हैं।
500 और 1000 रुपए का नोट बैन होने से जनता थोड़ी परेशान है लेकिन मार्केट के कुछ विशेषज्ञ हैं जो ये बता रहे हैं कि आने वाले वक्त में देश में प्रॉपर्टी के दाम में तेजी से गिरावट आ रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक जो लोग घर खरीदने का इंतजार कर रहे हैं उनके लिए आने वक्त में प्रॉपर्टी के दाम लगभग 30 फीसदी तक गिर सकते हैं।
30 फीसदी तक घटेंगे प्रॉपर्टी के दाम
वहीं प्रोपइक्विटी का मानना है कि नोटबंदी के चलते आने वाले 6-12 महीने में 42 प्रमुख शहरों में में मकानों की कीमत 30 प्रतिशत तक घट सकती है। फर्म का कहना है कि इससे 2008 के बाद डेवलपरों द्वारा बेची गई व अनबिकी आवासीय संपत्तियों का बाजार मूल्य 8 लाख करोड़ रुपए से भी अधिक घट जाएगा।
अगले 6-12 महीने में गिर सकते हैं दाम
बयान में कहा गया है,‘भारतीय जमीन जायदाद क्षेत्र पर नोटबंदी के असर के कारण अवासीय संपत्तियों का बाजार मूल्य अगले 6-12 महीने में 8,02,874 करोड़ रुपए घट जाएगा.' इसके अनुसार मकान कीमतों में गिरावट का सबसे अधिक असर मुंबई और उसके बाद बेंगलुरु व गुड़गांव पर होगा।
सस्ते होम लोन की उम्मीद
विशेषज्ञों के मुताबिक देश में कैश फ्लो बढ़ने से कर्ज का सस्ता होना तय है जिससे होम लोन भी सस्ता होने के पूरे आसार हैं। आंकड़ों के मुताबिक फिलहाल देश की GDP में रियल्टी सेक्टर का शेयर 11% है। अक्सर प्रॉपर्टी सौदों में टैक्स बचाने के लिए बड़ा लेनदेन नगद होता है।
वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट में भी जिक्र
वर्ल्ड बैंक की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में एक तिहाई काला धन सिर्फ प्रॉपर्टी बाजार में है। अब नोटबंदी के बाद से ये नकद मार्केट 20% से 30% नीचे जाना तय है। इसके बाद कैश फ्लो को सुधरने में करीब 6 महीने का वक़्त लग जाएगा।
नोटबंदी से रियल स्टेट सेक्टर पर पड़ा निगेटिव असर
बता दें कि शुरूआत में इसका रियल स्टेट सेक्टर पर निगेटिव असर पड़ेगा। बता दें कि नोट बैन होने के बाद अब इस सेक्टर में कालाधन खपाने वाले यहां से दूर होने लगेंगे। अनुमान के मुताबिक कालाधन के जरिये इन्वेस्टमेंट के लिए 40% महंगे मकानों की बिक्री होती है। इससे रियलटी सेक्टर में घाटा दूर होगा और मकानों की कीमतें गिरेंगी।
रियल स्टेट सेक्टर्स के शेयरों में दिखी गिरावट
इसका असर अभी से शेयर मार्केट पर दिखाई दे रहा है और रियलटी सेक्टर के शेयरों में 20% तक की गिरावट देखी जा रही है। रियल एस्टेट सेक्टर के गिरने के बाद बैंक होम लोन को 8.5 फीसदी तक कर सकते हैं। सरकार भी इस दिशा में कुछ कदम उठा सकती है और डाउन पेमेंट की सीमा को 10-15% से और कम किया जा सकता है।
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