'मेड इन चाइना', पिछले कुछ वर्षों में ये शब्द इतना आम हो गया कि लगभग हर तरह के इलेक्ट्रॉनिक ब्रांड पर 'मेड इन चाइना' लिखा हुआ दिखता था। चीनी उत्पाद के लिए भारत बड़ा बाजार है। तमाम इलेक्ट्रॉनिक आइटम भारत में चीन से ही आते हैं। आप जिस कंप्यूटर पर काम रहे हैं या फिर जो फोन इस्तेमाल कर रहे हैं उसमे से अधिकतर मेड इन चाइना ही हैं।
सस्ते इलेक्ट्रॉनिक आइटम
चीन के सस्ते इलेक्ट्रॉनिक आइटम भारत में तेजी से बिक रहे हैं। 2014 तक एक आंकड़े के मुताबिक भारत और चीन के बीच व्यापार 46 अरब डॉलर तक पहुंच गया था। हालांकि इसमें 37 अरब डॉलर चीन का भारत में व्यापार है जबकि महज 9 अरब डॉलर का व्यापार भारतीय कंपनियां चीन में कर रही हैं।
बढ़ा व्यापार घाटा
2014 के मुकाबले 2015-16 भारत और चीन के बीच व्यापार घटकर 44.7 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक इस दौरान भारत का निर्यात घटकर 7.56 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। दोनों देशों के बीच व्यापार घाटा बढ़ा है। इसके पीछे एक मुख्य वजह मेक इंन इंडिया कैंपेन भी है।
6 गुना बढ़ा चीनी निवेश
2014 के बाद चीनी कंपनियों को भारत में निवेश प्रतिबंधों में थोड़ी छूट दी गई है जिसका नतीजा है कि 2014-15 की तुलना में भारत में चीन का निवेश 6 गुना बढ़ गया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक 2015 में भारत में चीन का निवेश 87 करोड़ डॉलर है जो 2014 के निवेश के मुकाबले 6 गुना ज्यादा है।
चीन का पलड़ा भारी
वित्त जगत के तमाम अर्थशास्त्री मानते हैं कि भारत-चीन व्यापार के मामले में चीन का पलड़ा भारी है। पर अब चीन के उत्पादों के प्रति देश में माहौल बदल रहा है। उरी में हुए आतंकी हमले के बाद भी चीन का रुख पाकिस्तान के लिए जरा भी नहीं बदला है। भारत की सर्जिकल स्ट्राइक से पाकिस्तान परेशान है वहीं बलूचिस्तान में बलूचों ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे के खिलाफ आंदोलन शुरू कर रखा है।
कहां है विवाद
अब इसे जरा विस्तार से समझना होगा इस पूरे विवाद के केंद्र में कौन है और इससे किस-किस पर असर पड़ रहा है। सबसे पहले चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे को समझते हैं। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा चीन और पाकिस्तान दोनों के लिहाज से बेहद अहम है। खाड़ी देशों से चीन तेल और गैस की खरीदता है। साथ ही अपने सामान उन देशों को निर्यात भी करता है। हालांकि तेल और गैस की जरूरतें चीन रुस के जरिए पूरी कर लेता है लेकिन रूस चीन के अलावा यूरोपीय देशों को भी तेल और गैस की सप्लाई करता है। ओपेक देशों के बाद तेल और गैस उत्पाद में रुस पहले नंबर पर है।
चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे का विरोध
चीन पाकिस्तान के जरिए बलूचिस्तान से लेकर चीन के शांन्सी तक सड़क गलियारा बना रहा है। ये गलियारा पाक अधिकृत कश्मीर से होकर गुजर रहा है। भारत ने इस गलियारे पर आपत्ति जताई है। वहीं बलूचिस्तान में भी इस परियोजना का तेजी से विरोध हो रहा है। इससे अलग पाकिस्तान और चीन दोनों निर्माण कार्य में जुटे हुए हैं।
चीन की दोहरी नीति
उरी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल समझौते पर दोबारा विचार करने की बात कही थी। इससे पाकिस्तान में हड़कंप मच गया। वहीं चीन ने चीन-भारत और बांग्लादेश में होकर बहने वाली ब्रह्मपुत्र नदी की सहायक नदी का पानी रोक दिया है। चीन के इस कदम से पूरा देश हैरान है। इसके अलावा चीन ने भारत की एनएसजी सदस्यता और संयुक्त राष्ट्र में आतंकी मौलाना मसूद अजहर पर भारत के रुख का विरोध करते हुए वीटो किया है।
देश में चीनी उत्पाद का तेजी से विरोध
इस पूरे घटना क्रम ने भारत और चीन के बीच एक बार फिर विवाद पैदा कर दिया है। देश में चीनी उत्पादों को लेकर तेजी से विरोध शुरु हो चुका है। सोशल मीडिया पर लाखों की तादात में लोग चीनी सामान के बहिष्कार की बात कर हैं। दीपावली में चीन से बड़ी संख्या में पटाखे और लाइट्स डेकोरेश ने के उत्पाद आयात किए जाते हैं अब लोगों ने दीपावली पर ऐसे समानों को न खरीदने की अपील की है।


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