अगर आप सोशल मीडिया पर असभ्य भाषा का प्रयोग करते हैं या फिर किसी को बेवजह ट्रोल करते हैं तो शायद भविष्य में आपको लोन ना मिले और अगर मिले भी तो शायद उसकी ब्याज दर इतनी ज्यादा हो कि आप खुद ही मना कर दें।
अगर आप सोशल मीडिया पर असभ्य भाषा का प्रयोग करते हैं या फिर किसी को बेवजह ट्रोल करते हैं तो शायद भविष्य में आपको लोन ना मिले और अगर मिले भी तो शायद उसकी ब्याज दर इतनी ज्यादा हो कि आप खुद ही मना कर दें। इकोनामिक टाइम्स में प्रकाशित एक खबर को मुताबिक अब सोशल मीडिया पर किसी को परेशान करना आपको भारी पड़ सकता है। तो सोशल मीडिया पर सही व्यवहार सीख लीजिए नहीं तो भविष्य में आपको लोन 9 की बजाय 30 प्रतिशत की ब्याज दर से मिलेगा।
आपके हर कदम पर है नजर
डिजिटल युग में पनप रहे इस संसार में अब कुछ भी छुपा हुआ नहीं है। डिजिटल मीडिया में आप पर नजर रखी जा रही है। आप कौन सी वेबसाइट विजिट कर रहे हैं, क्या पढ़ रहे हैं, किससे चैट कर रहे हैं ये जानना आज के दौर में मुश्किल नहीं है। और अब इसी आधार पर लोगों के पर्सनल लोन का इंट्रेस्ट रेट भी तय होगा। ये इंट्रेस्ट रेट 9 पर्सेंट से लेकर 30 पर्सेंट तक हो सकता है।
परखी जाती है लोन लेने वाले की विश्वनीयता
ऑनलाइन लोन दिलाने वाली संस्थाएं जिसमें क्रेडिटमंत्री और बैंक बाजार डॉट काम है, वह क्रेडिट मार्केटप्लेस लोन लेने वाले ग्राहकों की पूरी जानकारी रखते हैं। यह जानकारी सिर्फ अकाउंट हैंडलिंग तक ही नहीं बल्कि आप के फोन की लोकेशन, डेटा, एसएमएस और सोशल मीडिया पर आपके बर्ताव पर भी नजर रखता है। इसके जरिए वह आपका एक पर्सनैलिटी स्कोर करता है, इस आधार पर ही लोन लेने वाले की विश्वसनीयता को परखा जाता है।
लोन चाहिए तो बर्ताव में लाएं सुधार
बैंकबाजार डॉट काम और क्रेडिट मंत्री जैसी वेबसाइट्स ग्राहकों को लोन दिलाने में मदद करती हैं। इकोनॉमिक टाइम्स ने इंस्टापैसा के सीईओ निखिल सामा के हवाले से लिखा है कि, किसी व्यक्ति ने गूगल पर क्या सर्च किया या कौन सी वेबसाइट विजिट की, वह उसकी पूरी हिस्ट्री देख सकते हैं। वहीं कैशई के फाउंडर वी कुमार बताते हैं कि लोन लेने वाला, जुआ खेलता है, शराब पीकर गाड़ी चलाता है या फिर जोखिम भरे काम करता है, इन सारी बातों की जानकारी मिल जाती है। उन्होंने आगे कहा कि यह सूचना का युग है, आपका सोशल मीडिया का अकाउंट आपकी क्रेडिट हिस्ट्री पर एक अमिट छाप छोड़ता है।
आपके अकाउंट का होता बारीक विश्लेषण
बताया जा रहा है कि इस तरह के विश्लेषण से ऐसे लोगों की पहचान की जाती है जिन्हें सैलरी नहीं मिलती लेकिन उनकी आय जारी रहती है। इस कटेगरी में वकील, फ्रीलांसर, और केंसल्टेंट आदि आते हैं। ऐसे लोगों को लोन देने में काफी सावधानी बरती जाती है। एक विशेषज्ञ ने बताया कि ऐसे लोगों के पास उनके खातों में बहुत रकम हो सकती है लेकिन सिर्फ वेतन ना मिलके के कारण उन्हें लोन ना मिले। इसीलिए ऐसे लोगों के पैन डीटेल्स, आधार डेटाबेस, डेट ऑफ बर्थ और उनके रजिस्टर्ड मोबाइल फोन नंबर को भी वेरिफाइ किया जाता है।
ग्राहकों की निजता पर उठे सवाल
ग्राहकों की निजता के सवाल पर कैशकेयर के फाउंडर विकास शेखर ने बताया, 'ओला, ऊबर, स्विगी और अन्य मोबाइल ऐप की तरह हम लोग भी मोबाइल डेटा ऐक्सेस करने से पहले ग्राहक की इजाजत लेते हैं। साथ ही हम ग्राहक के निजी मैसेज पर कभी नजर नहीं रखते। इसके अलावा ग्राहकों का डेटा कहीं पर भी स्टोर नहीं किया जाता है, इसे केवल जरूरत होने पर ही इस्तेमाल किया जाता है।


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