इम्प्लॉई प्रोविडेंट (ईपीएफ) और पब्लिक प्रॉविडैंट फंड (पीपीएफ) दोनों ही भविष्य को सुरक्षित करने के महत्वपूर्ण हैं। इन दोनों में ही आप अपने रिटायरमेंट के बाद के जीवन को बेहतर बनाने का काम कर सकते हैं। लेकिन दोनों में क्या अंतर है, यह जानना जरूरी है।
बहुत लोग इन दोनों में केवल इतना ही अंतर समझते हैं कि ईपीएफ केवल वेतनभोगी कर्मचारियों के लिये और ईपीएफ सभी लोगों के लिये होता है। चलिये दोनों को गहराई से समझते हैं-
इंम्प्लॉई प्रोविडेंट फंड (ईपीएफ)
इसे कर्मचारी भविष्य निधि भी कहते हैं, यह वो पैसा होता है, जो कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों की सैलरी से कट कर प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन में जमा होता है।
प्रति माह ईपीएफ = बेसिक सैलरी का 12% + डियरनेस अलाउंस या फिर 780 रुपए।
नियमत: जितना पीएफ कर्मचारी जमा करता है, उतना ही कंपनी को जमा करना चाहिये। लेकिन अब ऐसा बहुत कम होता है। कंपनी सीटीसी में खुद के द्वारा जमा किया जाने वाला पैसा भी जोड़ लेती है। ईपीएफ पर ब्याज दर 8.75 प्रतिशत है।
पब्लिक प्रोविडेंट फंड
इसे पोस्ट ऑफिस या कुछ चुनिंदा बैंकों में ही खोला जा सकता है। एक वित्तीय वर्ष में न्यूनतम जमा राशि 500 रुपए होती है। अधिकतम जमाराशि 150,000 हो सकती है। इसमें पैसा जमा करने से आपको आयकर में छूट भी मिलती है। कोई भी भारतीय जो भारत में रहता है, वह पीपीएफ अकाउंट खोल सकता है। एनआरआई या एचयूएफ इस अकाउंट को नहीं खोल सकते हैं।
ईपीएफ और पीपीएफ में अंतर पढ़ें स्लाइडर में-
लॉक इन पीरियड
-ईपीएफ: रिटायरमेंट या इस्तीफा देने के बाद लॉकिंग पीरियड समाप्त होता है।
-पीपीएफ: 15 साल का लॉकिंग पीरियड होता है। चाहें तो 5 साल बढ़ा सकते हैं।
आयकर छूट
-ईपीएफ: 5 साल से पहले निकाला तो धनराशि पर टैक्स लगेगा। अन्यथा 80C के अंतर्गत छूट।
-पीपीएफ: जमा राशि पर 80C के अंतर्गत छूट और मेच्योरिटी अमाउंट पर टैक्स नहीं है।
ब्याज दरें
-ईपीएफ: 8.75 प्रतिशत की ब्याज दर।
-पीपीएफ: 8.70 प्रतिशत की ब्याज दर।
लोन का विकल्प
-ईपीएफ: कितना लोन मिल सकता है, यह ईपीएफ संगठन तय करता है।
-पीपीएफ: जमा राशि का 50 प्रतिशत तक का लोन मिल सकता है।
धन निकासी
-ईपीएफ: जरूरत पड़ने पर कुछ जरूरी दस्तावेज दिखाने पर आप बीच में पैसा निकाल सकते हैं।
-पीपीएफ: जब तक मच्योरिटी पीरियड पूरा नहीं होता तब तक पैसा निकाल नहीं सकते।


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