[डॉ.एच.आर.केशव मूर्ति] अगर आप युवा हैं और आपके पास हुनर है, तो आप भारत सरकार की माइक्रो यूनिट्स डेवलपमेंट रिफाईनेंस एजेंसी यानी मुद्रा से ऋण लेकर अपना नया बिजनेस शुरू कर सकते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य है नए उद्ममों को शुरू करने के लिए सहयोग करना है।
कारपोरेट और व्यावसायिक संस्थाओं की भी भूमिका है, अनौपचारिक क्षेत्र के उद्यमों द्वारा इसकी सराहना की जानी चाहिए जिससे अधिक से अधिक संख्या में लोगों को रोजगार मिलेगा। कुल मिलाकर 5.77 करोड़ लघु व्यावसायिक इकाईयां हैं, जिनमें से अधिकतर एकल स्वामित्व वाली हैं जो लघु निर्माण, ट्रेडिंग या सेवा व्यवसाय चलाती हैं। इनमें से 62 प्रतिशत का स्वामित्व अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति/ओबीसी के पास है। निचले स्तर के कठोर परिश्रम करने वाले उद्यमियों की ऋण तक औपचारिक पहुंच कठिन हो गई है।
इस दिशा में हाल के बजट में एक प्रमुख पहल करने की घोषणा की गई है, जिसका नाम मुद्रा बैंक है।
माइक्रो यूनिट्स डेवलपमेंट रिफाईनेंस एजेंसी (मुद्रा) बैंक की घोषणा 2015 के बजट में की गई है, जिसके लिए 20,000 करोड़ रुपये का कोष निर्धारित किया गया है और इसमें 3,000 करोड़ रुपये की ऋण गारंटी राशि की घोषणा की गई है। मु्द्रा बैंक प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के जरिए सूक्ष्म वित्त संस्थानों का पुनर्वित्तीयन करेगा।
युवाओं को दिया जाता है लोन
कर्ज देते समय अनुसूचित जाति/जनजाति उद्ममों को प्राथमिकता दी जाएगी। इन उपायों से युवाओं, शिक्षित अथवा कौशल प्राप्त श्रमिकों का आत्मविश्वास बढ़ेगा जो पहली पीढ़ी के उद्यमी बनने की आकांक्षा रखते हैं; साथ ही इसमें वर्तमान लघु उद्यमी भी शामिल हैं जो अपनी गतिविधियों का विस्तार कर सकेंगे।
केंद्रीय वित्त मंत्री श्री अरुण जेटली ने अपने 2015-16 के बजट भाषण में कहा कि उनकी सरकार का दृढ़ मत है कि समग्र विकास होना चाहिए़। सरकार का एक वैधानिक अध्यादेश के जरिए मुद्रा बैंक बनाने का प्रस्ताव है। यह बैंक निर्माण, ट्रेडिंग और सेवा गतिविधियों में लगे सूक्ष्म/लघु व्यावसायिक संस्थाओं को ऋण देने के कार्य में लगे सभी सूक्ष्म वित्तीय संस्थानों के नियमन और पुनर्वित्तीयन के लिए जिम्मेदार होगा।


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