म्यूचुअल फंड लेते वक्त ये 7 बातें पढ़ना कतई मत भूलें

म्यूचुअल फंड का विज्ञापन जब टेलीविजन पर आता है तो अंत में एक सूचना प्रसारित की जाती है, "म्युचुअल फंड बाज़ार के जोख‍िम का विषय है, कृपया इसे लेने से पहले नियम एवं शर्तें ध्यानपूर्वक पढ़ें।" इसके बावजूद देश में तमाम ऐसे लोग हैं जो म्यूचुअल फंड लेते वक्त उसमें लिखी बातें नहीं पढ़ते। कारण है समय का अभाव, जो आपके पास भी जरूर होगा। इसीलिये हम आपको बताने जा रहे हैं कि म्यूचुअल फंड लेते वक्त अगर आपके पास डॉक्यूमेंट पढ़ने का समय नहीं है, तो कम से कम नीचे लिखीं सात बातें जरूर पढ़ लें, ताकि जोख‍िम कम से कम रहे।

Investment

हम आपको बताना चाहेंगे कि म्यूचुअल फंड में निवेश करना कोई आसान खेल नहीं है। आपको रिस्क लेने की अपनी क्षमता का आंकलना करते रहना पड़ेगा। साथ ही अपना ट्रैक रिकॉर्ड चेक करते रहना होग, कि कहीं आप गलत तो नहीं जा रहे हैं। यह भी जरूरी है कि कोई भी स्कीम लेने से पहले यह पता कर लें कि वो कैसी है।

यह बहुत महत्वपूर्ण है कि म्युचुअल का एंट्री और एग्ज‍िट लोड हमेशा चेक करते रहें। साथ ही आप पर कितना मैनेजमेंट शुल्क लग रहा है, इसकी जांच भी हर महीने आपको करनी होगी। खैर अब पढ़ें वे सात टिप्स जिनके साथ आगे बढ़कर आप म्युचुअल फंड से अपने धन पर मंडाने वाले रिस्क को कम कर सकते हैं।

1) यह स्कीम इक्व‍िटी स्कीम है अथवा डेब्ट से संबंध‍ित कोई स्कीम है?

म्यूचुअल फंड में निवेश करने से पहले यह सुनिश्च‍ित कर लें कि आप जिस स्कीम में निवेश करने जा रहे हैं वो डेब्ट स्कीम है या फिर इक्व‍िटी स्कीम। अगर आप रिस्क लेने से विरुद्ध हैं या फिर रिस्क लेने से डरते हैं तो हो सकता है इक्व‍िटी में निवेश करते वक्त आप इस बारे में सोचना भूल जायें। दूसरी ओर हो सकता है आपका मन डेब्ट स्कीम में निवेश करने का भी करे।

2) आय अथवा धन में वृद्ध‍ि

अगर आप सेवानिवृत्त हो चुके हैं, तो हो सकता है आपको हर महीने एक निश्च‍ित धनराश‍ि प्राप्त करने की चाह हो। तब हो सकता है आप बाजार में ऐसी स्कीम की खोज करेंगे, जिसमें हर महीने इनकम होती हो। साथ ही सुरक्षा की गारंटी भी आप चाहेंगे। ऐसे में हो सकता है कि कैपिटल ग्रोथ के विकल्प पर आप सोचना भूल जायें।

3) ओपन एंडेड अथवा क्लोज़ एंडेड

अगर आप अपनी स्कीम में लिक्व‍िडिटी चाहते हैं, यानी आप अपनी स्कीम को जब चाहे तब बेच सकें, तो बेहतर होगा आप ओपन एंडेड स्कीम में ही निवेश करें। क्लोज एंडेड स्कीम में इस प्रकार की स्वतंत्रता शायद आपको नहीं मिलेगी।

4) फंड का ट्रैक रिकॉर्ड

क्या म्यूचुअल फंड का ट्रैक रिकॉर्ड हमेशा अच्छा होता है? एक निवेशक के ज़हन में यह सवाल हमेशा घूमता रहता है। जब भी म्यूचुअल फंड खरीदें, तब डॉक्यूमेंट में ट्रैक रिकॉर्ड पढ़ना मत भूलें।

5) रिस्क फैक्टर यानी जोखिम के कारक

म्यूचुअल फंड के डॉक्यूमेंट में हमेशा रिस्क फैक्टर यानी जाख‍िम के कारक भी प्रकाशित किये जाते हैं। ज्यादातर कारक तो सभी में पाये जाते हैं यानी आम होते हैं, लेकिन फिर भी आप उन्हें ध्यान पूर्वक पढ़ें। कभी-कभी उसी में से आपके फायदे की चीज सामने आ सकती है।

6) न्यूनतम निवेश

न्यूनतम निवेश के मामले में कभी-कभी म्यूचुअल फंड इंवेस्टमेंट स्कीम अलग-अलग हो सकती हैं। इसलिये जरूर है कि आप निवेश करने से पहले पढ़ लें कि म्युचुअल फंड में न्यूनतम निवेश की धनराश‍ि कितनी है। सभी ओपन एंडेड स्कीम में एक न्यूनतम धनराशि लिखी होती है, जिससे कम आप निवेश नहीं कर सकते। यह धनराश‍ि अलग-अलग स्कीम के लिये अलग-अलग होती है।

7) खर्च एवं शुल्क

स्व‍िचिंग चार्ज (स्कीम से दूसरी में स्थानांतरित करने पर पड़ने वाला शुल्क) , एंट्री लोड (स्कीम में प्रवेश यानी उसे खरीदते वक्त पड़ने वाला शुल्क), एक्ज‍िट लोड (स्कीम को बंद करते वक्त अथवा वापस बेचने व सरंडर करते वक्त पड़ने वाला शुल्क), मैनेजमेंट फीस (प्रबंधन शुल्क) और शुल्क को ध्यानपूर्वक पढ़ लें। यह बात हमेशा ध्यान में रखें कि जरूरत है, कि म्यूचुअल फंड कंपनियां कोई समाज सेवा नहीं कर रही हैं। वो कंपनियां भी पैसा बनाने के लिये काम कर रही हैं, जाहिर है, पैसा नहीं बना रही होतीं, तो उनका अस्त‍ित्व ही नहीं होता। इसलिये जितना भी खर्च करें, उसे डायरी में नोट करते जायें।

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