
भारत में मोबाइल का बड़ा बाजार तो सुना था लेकिन सोने की इतनी बड़ी खरीद के बारे में सुनकर आप जरूर चौंके होंगे। दरअसल, भारतीय कहीं ओर निवेश के बजाए सोने में निवेश को अधिक सुरक्षित समझते हैं। इसी बात को लेकर आईआईएम बेंगलोर के पूर्व प्रोफेसर प्रो. वैद्यानथन ने अपने पुस्तक 'इंडिया अनइंक' में भी सोने को अधिक जरूरी व सुरक्षित निवेश व बचत का जरिया बताया है।
लाखों करोड़ों रुपए की होती है खरीदारी
भारत में हर साल कई लाख करोड़ रुपए का सोना खरीदा जाता है। प्रो. वैद्यानाथन के मुताबिक वर्ष 2012 में भारत के लोगों ने 2 लाख 15 हजार करोड़ रुपए खर्च कर सोना खरीदा। या कहिए सोना खरीदकर बचत का जरिया खोज लिया जाता है। आपको बता दें कि इसमें सबसे ज्यादा महिलाओं ने अपने लिए ज्वेलरी के रूप में खरीदा है। भारत खासकर महिलाओं के लिए ज्वेलरी की खरीद की वजह से भी सोने का एक बड़ा बाजार बन गया है।
बचत के रूप में देखें सोने की खरीदारी को
आईआईएम बेंगलोर के पूर्व प्रोफेसर आर. वैद्यानाथन अपनी किताब इंडिया अनइंक में मानते हैं कि सोने को देश में बचत और निवेश के रूप में देखना चाहिए बल्कि हमारे देश में इसे उपभोग के तौर पर ज्यादा देखा जाता है। प्रो. वैद्यानाथन इस तर्क को भी खारिज करते हैं कि महिलाओं द्वारा ज्वेलरी खरीदना फिजूल खर्चों में आता है। आपको बता दें कि भारत के कई आर्थिक जानकार यह मानते हैं कि ज्वेलरी में निवेश प्रोडक्टिव नहीं होता।


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