
सीआऱआर एक दर होती है। जो रिजर्ब बैंक द्वारा अन्य सरकारी बैंकों पर लागाई जाती हैं। ये रिजर्ब बैंक की मौद्रिक नीति के अंदर आती हैं। इसको सरलता से समझने के लिए हमें ये समझना ज्यादा जरूरी हो जाता हैं कि इसकी फुल फोर्म क्या है?
सीआरआऱ- सी मतलब यानी कैश (नकदी), आर यानी रिजर्व और आंतिम में लगने वाले आर यानी रेट (दर)।
अब सीआरआर को समझने के लिए बस एक शब्द पर ध्यान देने की जरूरत है। रिजर्व यानी हिंदी में कहें तो पहले से तय किया हुआ या पहले बचाकर रखा गया। इसी प्रकार कह सकते हैं कि कैश रिजर्व दर यानी पहले से ही तय की गई दर पर कुछ राशी बचाकर रखना। तो इसी तरह हम समझ सकते हैं कि ये एक दर होती है जो रिजर्ब बैंक द्वारा राष्ट्रीय बैंको में जमा राशी पर लगाई जाती है जिस दर पर बैंक अपने अमाउंट के एक निर्धारित हिस्से को आरबीआई में रिजर्व रखते हैं।
आपके वैल्थ पर यह असर
आरबीआई यदि सीआरआर रेट को बढ़ाती है तो बैंकों को पहले से ज्यादा राशि आरबीआई के पास रिजर्व रखनी होगी जिसके कारण बैंकोें के पास कैश पहले की तुलना में कम हो जाएगा। यही कारण है कि जब कैश कम हो जाएगा तो बैंक के पास लोन देने के लिए पैसा नहीें होगा। आपकी जमा राशि पर मिलने वाला ब्याज भी घट सकता है। और लोन पर ब्याज दरें भी बढ़ाई जा सकती हैं।
इससे क्या होता है आपको फायदा या नुकसान
अगर सीआरसाआर रेट में उतार-चढाव होता है तो सबसे पहले बजार में उपलब्ध नकदी पर इसका प्रभाव पड़ता है और समाज पर भी इसका प्रभाव पड़ता है। दरअसल अगर रिजर्ब बैंक सीआरसीआर दर में बढोतरी करता है तो बैंको को अपने पास उपलब्ध नकदी का पहले के तुलना में अधिक भाग रिजर्ब बैंक के पास जमा रखना होगा। जिससे बैंको पर नकदी कम होगी और लोग को लोन देने में कटोती करनी होगी।


Click it and Unblock the Notifications