
ऐसी घटना किसी के भी साथ हो सकती है। आपके साथ भी। क्या आपके पास कोई कैशलेस मेडिक्लेम पॉलिसी है? अगर है, तो बहुत अच्छी बात है, लेकिन अगर नहीं है, तो जल्द से जल्द किसी इंश्योरेंस कंपनी से संपर्क कर 'कैशलेस मेडिक्लेम पॉलिसी' लें। मेडिक्लेम पॉलिसी लेते वक्त किन बातों का ध्यान रखना है और क्यों लेना जरूरी है यह हम आपको बतायेंगे इस लेख में-
क्या है कैशलेस मेडिक्लेम पॉलिसी-
टी पी ए अर्थात् 'थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेशन' ने देश के कई बड़े और अत्याधुनिक अस्पतालों से टाई अप कर रखा है। ऐसे में जब आप किसी कंपनी से हेल्थ इंश्योरेन्स पॉलिसी लेते हैं तो यह आपको एक आई कार्ड (पहचान पत्र) उपलब्ध करवा देती है। आपातकालीन स्थिति आने पर आप कंपनी द्वारा चिन्हित किसी भी अस्पताल में यह कार्ड देकर इलाज करवा सकते हैं।
महत्वपूर्ण बिन्दु
इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए यह बेहद आवश्यक है कि आप समय-समय पर टीपीए द्वारा चिन्हित अस्पतालों की लिस्ट इन्टर नेट पर देखते रहें। ऐसा हो सकता है कि यह पॉलिसी लेते समय जिन अस्पतालों के नाम टीपीए की लिस्ट में हों जब आपको जरूरत पड़े तो उस अस्पताल का सम्बद्ध टीपीए से समाप्त हो चुका हो। इसलिए यह जरूरी है कि समय-समय पर आप टीपीए की वेबसाइट चेक करते रहें। साथ ही यह भी देखते रहें कि किन किन बीमारियों में यह पॉलिसी लागू होती है।
मेडिक्लेम पॉलिसी दो प्रकार की होती है,
पहली वह जिसमें आप इलाज का खर्च वहन करते हैं और कंपनी आपको भुगतान करती है, दूसरी वह जिसमें कंपनी सीधे अस्पताल को भुगतान करती है।
नियम व शर्तें
1. कोई भी पॉलिसी लेते वक्त सबसे पहले यह देख लें कि वह आई आर डी ए अर्थात् बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण द्वारा मान्यता प्राप्त है या नहीं।
2. कैशलेस मेडिक्लेम पॉलिसी लेते वक्त आप उसमें दी गयी शर्तें और छूट ठीक तरह से जान लें। कई बार कंपनियां आपको लुभाने के लिए भी छूट देती हैं। यह भी धारणा है कि प्राइवेट अस्पताल अधिक बिल लेते है। इसलिये कई कंपनियां जैसे न्यू इंडिया लाइफ इंश्योरेंस, ओरिएंटल इंश्योरेंस और यूनाइटेड इंडिया लाइफ इंश्योरेंस ने कई निजी अस्पतालों से अपना सम्बद्ध खत्म कर लिया है।
इसलिये यह बेहतर होगा कि 'कैशलेस मेडिक्लेम पॉलिसी' लेते वक्त आप उसकी वास्तविक स्थिति को जान लें।


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