भारत में zomato और swiggy दोनों ही खाना उपलब्ध कराने के लिए काफी प्रसिद्ध प्लेटफ़ॉर्म माने जाते हैं, ये प्लेटफ़ॉर्म छोटे भोजनालयों के लिए विसिबलिटी बढ़ाते हैं, बिना उन्हें प्रचार या डिलीवरी बेड़े में निवेश करने की आवश्यकता के, हालांकि इन इन प्लेटफ़ॉर्म द्वारा लगाए गए कमीशन दरों को रेस्टोरेंट द्वारा उनको सही माना जाता है, क्योंकि वे बेहतर खोज की सुविधा प्रदान करते हैं।

छोटे शहरों में विकास की संभावना
अनुमान है कि 2030 तक बाहर खाने और घर पर ऑर्डर करने का बाजार लगभग दोगुना हो जाएगा, जो टियर II और III शहरों में बढ़ती खपत और शहरीकरण के कारण हो रहा है। ये क्षेत्र फूड डिलीवरी प्लेटफार्मों के लिए रेवेन्यू ग्रोथ के लिए अगला फोकस बन रहे हैं, क्योंकि पूरा बाजार विकास स्थिर हो गया है।
स्थानीय कारोबारी इन शहरों में नए भोजन की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए नए-नए मेनू के साथ अपना खुद का बिजनेस शुरू कर रहे हैं। स्थापित ब्रांड भी बड़े बाजार हिस्से पर कब्जा करने के लिए टियर II और III शहरों में विस्तार कर रहे हैं। यह तरीका छोटे शहरों की ओर बदलाव का संकेत देता है जो महानगरों की तुलना में फूड डिलीवरी प्लेटफार्मों के बिजनेस में अधिक महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
चुनौतियां और समाधान
विकास की संभावनाओं के बावजूद कई रेस्टोरेंट के लिए डिलीवरी एक चुनौती बनी हुई है। स्विगी और ज़ोमैटो जैसे प्लेटफ़ॉर्म अपनी लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञता के साथ इस समस्या का समाधान करते हैं, और इस कमी को प्रभावी ढंग से पूरा करते हैं। जैसे-जैसे इन छोटे शहरों में रेस्टोरेंट की गुणवत्ता और आपूर्ति में सुधार होता है, इन प्लेटफ़ॉर्म के लिए बिजनेस के मामले में वे मेट्रो के योगदान को पार करने की उम्मीद करते हैं।
डिलीवरी छूट और लॉयल्टी प्रोग्राम टियर II और III शहरों में उपभोक्ताओं के बीच लोकप्रिय हैं, हालांकि महानगरीय क्षेत्रों में ऑर्डर की आवृत्ति अधिक है। ये प्रोत्साहन उपभोक्ता जुड़ाव और बार-बार ऑर्डर करने में मदद करते हैं, जिससे फूड डिलीवरी बाजार के पूरे विकास में योगदान मिलता है।


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