नई दिल्ली, जुलाई 11। भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होता जा रहा है। एक साल पहले रुपया डॉलर के मुकाबले 73.21 रुपए था और अब लगभग 77.62 रुपये के स्तर पर आ गया है। अगर हम दूसरे शब्दों में कहें तो पिछले 1 साल में रुपये के मुकाबले डॉलर में 6 फीसदी की तेजी आई है। इस साल जनवरी के बाद से भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 4 प्रतिशत कमजोर हुआ है। अगर यूएस फेड ने 2022 में उम्मीद से अधिक ब्याज दर बढ़ाई तो रुपए में अभी और गिरावट देखने को मिल सकती है।
2017 से ही जारी है गिरावट
रुपए के गिरावट को अगर हम 2017 से देखे तो 2017 में आपको एक डॉलर खरीदने के लिए 64 रुपये खर्च करने पड़ते थे, लेकिन अब आपको 77 रुपये की जरूरत है। यह रुपए की कमजोर स्तर को दर्शाता है। इससे यह भी पता चलता है कि डॉलर के मुकाबले रुपये में सालाना आधार पर लगभग 3.75 फीसदी की गिरावट आई है। रुपये के गिरने या कमजोर होने का अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक और नकारात्मक दोनों तरह के प्रभाव पड़ने के अलावा हमारे व्यक्तिगत वित्त पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता है। भारतीय रुपये के गिरने पर निर्यातकों को लाभ होता है, भारत बड़े पैमाने पर एक आयात करता है दो रुपए का गिरना देश के आयात के लिए ठीक नहीं है।
महंगा होगा इम्पोर्टेड सामान
जब रुपया कमजोर होता है तो आयातित सामान महंगा हो जाता है। भारत एक प्रमुख तेल आयातक होने के कारण अन्य सामानों पर भी व्यापक प्रभाव पड़ता है। बढ़ती मुद्रास्फीति को आंशिक रूप से आईएनआर गिरने के कारण माना जा रहा है। रुपए के गिरने से डेली यूज की इम्पोर्टेड वस्तुओं के दामों में भी फर्क आता है।
उधार लेने की लागत बढ़ जाती है
रुपया गिरने का यह भी एक अप्रत्यक्ष प्रभाव है कि आपके ऋण पर ईएमआई ऐसे समय में बढ़ जाती है जब रुपया कमजोर हो रहा होता है। जब मुद्रास्फीति बढ़ती है, तो आरबीआई रेपो दर बढ़ा के मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने की कोशिश करता है। रेपो दर में वृद्धि के साथ, ब्याज दर बढ़ती है जिससे उधारी लागत अधिक होती है। व्यवसायों और खुदरा उधारकर्ताओं दोनों को पहले की तुलना में अधिक ब्याज और अधिक ईएमआई चुकानी पड़ती है।
आपकी विदेश शिक्षा महंगी हो जाती है
विदेशी शिक्षा के लिए डॉलर भेजना महंगा हो जाएगा। विदेशी शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों को आदर्श रूप से गिरते हुए रुपए के प्रभाव से बचने के लिए लिए विदेशी बैंक खाते में डॉलर रखना चाहिए।
विदेश में छुट्टियां
अपने परिवार को इंटरनेशनल वेकेशन पर ले जाना और महंगा हो जाएगा। जब आप बैंकों, क्रेडिट कार्ड आदि के माध्यम से डॉलर खरीदने के लिए रुपए का लेनदेन करेंगे तो आपको प्रति डॉलर के लिए अधिक खर्च करना पड़ेगा।
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