Foreign Direct Investment: एफडीआई 2023 के अंतर्गत उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने पहली कंपनी को फ्रंट इंड लैंड सब्सिडी देने का फैसला किया है। इस दौरान सरकार ने 75 प्रतिशत फ्रंट इंड लैंड सब्सिडी का प्रस्ताव दिया है, जिसके तहत नोएडा के गौतमबुद्ध नगर जिले में 25 एकड़ जमीन की मंजूरी दी गई है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने एफडीआई पॉलिसी के तहत पहली बार किसी कंपनी को फ्रंट इंड लैंड सब्सिडी देने का फैसला किया है। ये मंजूरी ऐसे समय में आई है जब 1.4 अरब लोगों द्वारा ऐसी सरकार चुने जानें की उम्मीद है, जो अगले 5 वर्षों तक शासन करेगी।
प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी एफडीआई पॉलिसी के तहत इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कमिश्नर मनोज कुमार सिंह ने फूजी सिलवरटेक कंक्रीट प्राइवेट लिमिटेड के द्वारा प्रस्तावित प्रोजेक्ट के लिए फ्रंट इंड लैंड सब्सिडी की मांग पर लेटर ऑफ अप्रूवल के साथ ही एलिजिबिलिटी सर्टिफिकेट भी जारी किया है।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने कुछ समय पहले ही उत्तर प्रदेश फॉरेन डेवलपमेंट पॉलिसी को मंजूरी दी है। पॉलिसी बनने के बाद यह किसी भी कंपनी को दिया जाने वाला लैंड सब्सिडी के अप्रूवल का पहला मामला है। इस दौरान फूजी सिल्वर्टेक कंक्रीट प्राइवेट लिमिटेड (एफएससीपीएल) के एमडी को लेटर भी भेजा गया है।
बताते चलें कि एफएससीपीएल के एमडी को भेजे गए इस लेटर में कहा गया है कि इन्वेस्ट यूपी मूल्यांकन समिति ने 22 नवंबर 2023 को आयोजित की गई बैठक में प्रस्ताव का मूल्यांकन किया और फ्रंट इंड भूमि सब्सिडी के अनुदान के लिए एफडी फॉर्चून ग्लोबल 500 और फॉर्च्यून इंडिया 500 कंपनियों की निवेश प्रोत्साहन नीति 2023 के खंड 31 के अनुसार गठित अधिकार प्राप्त समिति से मामले की सिफारिश की।
इसके तहत अधिकार प्राप्त समिति ने यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण, गौतम बुद्ध नगर जिले में 10 हेक्टेयर (लगभग 25 एकड़) भूमि के लिए परियोजना के लिए फ्रंट इंड भूमि सब्सिडी का 75 प्रतिशत देने के आपके प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस परियोजना को यमुना एक्सप्रेसवे उद्योग की विकास प्राधिकरण में प्रस्तावित किया गया है। इस प्रोजेक्ट में वेट कास्ट टेक्नोलॉजी और सल्फर कंक्रीट टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके प्रीकास्ट कंक्रीट प्रोडक्ट की मैन्युफैक्चरिंग की जानी है।
इस प्रोजेक्ट को दो फेज में बनाया जाना है। इसके पहले चरण में 650 टीडीपी की क्षमता होगी और दूसरे चरण में 350 टीडीपी की अतिरिक्त क्षमता होगी। इन दोनों फेज को को तैयार करने में कम से कम 300 करोड़ रुपए की लागत आएगी। इनमें पहला चरण और दूसरा चरण दोनों ही 150 करोड़ रुपए की लागत से तैयार होने हैं। मीडिया के द्वारा मिल रही जानकारी के मुताबिक इस परियोजना का पहला चरण तैयार होने के बाद कम से कम 700 लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलने की उम्मीद है।
गौरतलब है कि इसके पहले चरण में फॉरेन कैपिटल से 100 करोड़ रुपए (85 करोड़ रुपए का स्टैंड बाय लेटर ऑफ क्रेडिट और 15 करोड़ रुपए की इक्विटी) का निवेश होगा। वहीं भारतीय प्रमोटर द्वारा 50 करोड़ रुपए (10 करोड़ रुपए की इक्विटी और 40 करोड़ रुपए का लोन) का निवेश किया जाएगा।


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