यस बैंक को दूसरी तिमाही यानी सितंबर तिमाही में 629 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है। जी हां खराब श्रृणों में वृद्धि होने से उसे 639.1 करोड़ रुपए का एकीकृत घाटा हुआ है। बता दें कि इस प्राइवेट बैंक को पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 951.47 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ हुआ था। जबकि चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में बैंक को 95.56 करोड़ रुपए का मुनाफा हुआ था।
तो वहीं वित्त वर्ष 2019-20 की जुलाई-सितंबर तिमाही में बैंक की कुल आय भी घटकर 8,347.50 करोड़ रुपए रही, जो वित्त वर्ष 2018-19 की समान तिमाही में 8,713.67 करोड़ रुपए थी। आपको बता दें कि 30 सितंबर, 2019 को बैंक का सकल एनपीए कुल ऋण का 7.39 प्रतिशत हो गया, जो एक साल पहले 1.60 प्रतिशत था। बैंक का शुद्ध एनपीए भी इस दौरान 4.35 प्रतिशत हो गया, जो पिछले साल की समान तिमाही में 0.84 प्रतिशत था।

इस बारे में बैंक ने कहा कि खराब ऋण और आपात स्थिति के लिए उसने 1336.25 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। पिछले साल बैंक ने 942.53 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था। एकल आधार पर दूसरी तिमाही में बैंक को 600.08 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ है। पिछले वित्तीय वर्ष की दूसरी तिमाही में बैंक को 964.70 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ हुआ था।
1 अक्टूबर को बैंक का शेयर 29.05 रुपये पर कारोबार कर रहा था। इस हिसाब से बैंक के शेयर में 150 प्रतिशत की वृद्धि हो गई है। गुरूवार को बैंक के शेयरों में लगभग सात सौ करोड़ रुपये की ट्रेडिंग हुई।
वर्तमान में यस बैंक पूंजी तरलता की कमी से जूझ रहा है। इस कारण से वे लंबे समय से ऐसे निवेशकों को ढूंढ रहे थे, जो कि बैंक में निवेश करके पूंजी की तरलता को बढ़ा सकता है। एसपीजीपी के अलावा टीपीजी, फारालौन कैपिटल और कार्ले समूह भी बैंक में हिस्सा खरीदने के लिए तैयार हैं।


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