Year Ender 2025: RBI ने इस साल कौन-कौन से बड़े बदलाव किए हैं? जानें केंद्रीय बैंक की टॉप 10 बड़ी घोषणाएं

Year Ender 2025; RBI Top 10 Big Announcement: साल 2025 का अंत होने वाला है और पूरे साल में होने वाली प्रमुख घटनाओं को देखें तो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वित्तीय नियमों में कई बड़े बदलाव किए हैं। 2025 में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने अर्थव्यवस्था को सपोर्ट करने के लिए कई महत्वपूर्ण बदलाव किए, खासकर मुद्रास्फीति (inflation) कम होने और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच विकास को बढ़ावा देने के लिए।

RBI Announcement 2025

इस पूरे साल में आरबीआई की बड़ी घोषणाओं में मुख्य फोकस मौद्रिक नीति (Monetary Policy) में रेपो रेट कट्स पर रहा, साथ ही लिक्विडिटी और रेगुलेटरी बदलावों पर भी सबकी नजरें बनी रहीं। इस साल आरबीआई ने रेपो रेट को चौथी बार घटाते हुए कुल 125 बेसिस पॉइंट की कटौती की है, जिससे आम लोगों को काफी राहत मिली है।

तो चलिए यहां जानते हैं कि 2025 में RBI की कौन सी टॉप 10 घोषणाएं या बदलाव हैं और कब-कब उनकी घोषणा की गई...

2025 में RBI की 10 बड़ी घोषणाएं

1- फरवरी 2025: रेपो रेट में 25 bps कट करके 6.25% किया। FY26 के लिए GDP ग्रोथ अनुमान 6.7% रखा। नई गवर्नर संजय मल्होत्रा की पहली पॉलिसी में ग्रोथ को बूस्ट देने का संकेत।

2- अप्रैल 2025: रेपो रेट में फिर 25 bps कट करके 6.00% किया। स्टांस को 'neutral' से 'accommodative' में बदला। GDP ग्रोथ प्रोजेक्शन को 6.5% पर रिवाइज किया (ग्लोबल अनिश्चितताओं के कारण)।

3- जून 2025: सबसे बड़ा कट - रेपो रेट में 50 bps कमी करके 5.50% किया। CRR में भी कट। इन्फ्लेशन अनुमान 3.7% और GDP 6.5% रखा।

4- अगस्त/अक्टूबर 2025: रेपो रेट 5.50% पर अपरिवर्तित रखा (पॉज)। कई रेगुलेटरी बदलाव, जैसे SRVA बैलेंस का कॉर्पोरेट बॉन्ड्स में निवेश अनुमति, बेसिक सेविंग अकाउंट में डिजिटल सर्विसेज शामिल करना, और बैंकिंग सेक्टर में क्रेडिट फ्लो बढ़ाने के उपाय।

5- दिसंबर 2025: रेपो रेट में 25 bps कट करके 5.25% किया (कुल 2025 में 125 bps कट)। न्यूट्रल स्टांस बनाए रखा।

6- लिक्विडिटी इंजेक्शन (दिसंबर 2025): बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी बढ़ाने के लिए ₹1 लाख करोड़ के OMO (ओपन मार्केट ऑपरेशंस) और $5 बिलियन फॉरेक्स स्वैप की घोषणा।

7- GDP और इन्फ्लेशन प्रोजेक्शन रिवीजन: FY26 GDP ग्रोथ को 7.3% तक अपग्रेड किया, इन्फ्लेशन को 2.0% तक डाउनग्रेड (बेनाइन इन्फ्लेशन के कारण)।

8- फॉरेन ट्रेड और INR सपोर्ट: मेजर ट्रेडिंग पार्टनर्स की करेंसी के लिए ट्रांसपेरेंट रेफरेंस रेट्स स्थापित करने का प्रस्ताव। रुपये की अस्थिरता पर कंट्रोल के उपाय।

9- बैंकिंग रेगुलेशंस में सुधार: इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग कॉस्ट कम करना, IPO फाइनेंसिंग और शेयर्स के खिलाफ लेंडिंग बढ़ाना, एक्विजिशन फंडिंग की अनुमति।

10- अन्य उपाय: प्री-पेमेंट चार्जेस पर छूट (व्यक्तिगत लोन्स के लिए), गोल्ड लोन्स और PSL टार्गेट्स पर अपडेट, डिजिटल फ्रॉड प्रिवेंशन और फाइनेंशियल इंक्लूजन के लिए नए नियम।

ये बदलाव मुख्य रूप से ग्रोथ को सपोर्ट करने, EMI कम करने और लिक्विडिटी सुनिश्चित करने के लिए थे, जबकि इन्फ्लेशन कंट्रोल में रही। कुल मिलाकर, 2025 RBI की पॉलिसी ग्रोथ-ओरिएंटेड रही, जिससे होम/कार लोन्स सस्ते हुए और अर्थव्यवस्था को बूस्ट मिला।

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