महंगाई ने लोगों की टेंशन बढ़ा दी है. थोक महंगाई दर मई महीने में 15 महीने के सबसे उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है. सरकार की तरफ से जारी आंकड़ों के मुताबिक मई में थोक महंगाई दर 2.61% रही, जोकि फरवरी 2023 के बाद सबसे ज्यादा है. थोक महंगाई बढ़ने की वजह खाने-पीने के सामानों में उछाल, खाद्य उत्पादों को बनाना, मिनरल ऑयल, पेट्रोलियम और नेचुरल गैस समेत अन्य की मैन्युफैक्चरिंग में बढ़ती लागत रही.
लगातार बढ़ रही थोक महंगाई
थोक महंगाई दर FY25 के पहले महीने में 1.26% पर थी. यानी अप्रैल में महंगाई दर 13 महीने की ऊंचाई पर थी, जबकि मार्च में ये 0.53% पर थी. बता दें कि होलसेल प्राइस इंडेक्स यानी WPI थोक कारोबार में सामानों की कीमतों को मापता है. थोक कारोबार के तहत बड़े अमाउंट में सामानों का ट्रेड होता है. WPI फैक्टरी गेट प्राइस को मापता है. इसे मिनिस्ट्री ऑफ कॉमर्स जारी करता है.

WPI के लिए बेस ईयर 2011-12 है. इसके तहत तीन कैटेगरी को मापा जाता है, जिसमें प्राइमरी आर्टिकल, फ्यूल एंड पावर और मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स शामिल हैं. प्राइमरी आर्टिकल में फूड और नॉन-फूड आर्टिकल्स आते हैं.
मई महीने के लिए जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक फूड आर्टिकल्स की कीमत मासिक आधार पर 1.48% और मिनरल्स की कीमत 1.08% बढ़ी है. जबकि नॉन-फूड आर्टिकल की कीमत 1.26% गिरी है. वहीं, क्रूड पेट्रोलियम एंड नेचुरल गैस में 3.56% और इलेक्ट्रिसिटी में 11.67% की गिरावट दर्ज की गई.
रिटेल महंगाई 12 महीने में सबसे कम
थोम महंगाई से पहले 12 जून को रिटेल महंगाई के आंकड़े जारी हुए. देश में मई महीने के दौरान रिटेल महंगाई दर 4.75% रही, जबकि अनुमान 4.9% की थी. इससे पहले अप्रैल में रिटेल महंगाई दर 4.83% रही थी. वहीं मार्च 2024 में महंगाई की दर 4.85% रही थी.
मई में खाद्य महंगाई दर मासिक आधार पर 8.70% से घटकर 8.69% पर आ गई है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक ग्रामीण महंगाई दर 5.28% रही, जोकि अप्रैल में 5.43% थी. शहरी महंगाई दर की बात करें तो मासिक आधार पर ये 4.11% से बढ़कर 4.15% पर पहुंच गई है. साग-सब्जियों और दाल की महंगाई अभी भी लोगों को सता रही है.


Click it and Unblock the Notifications