WPI inflation August 2025 : देश में एक बार फिर से खाने-पीने की चीजें और कुछ जरूरी सामान की कीमतें बढ़ गई हैं, जिसका सीधा असर थोक महंगाई (WPI Inflation) के अगस्त के आंकड़े दिखाई दे रहा है। सरकार ने सोमवार (15 सितंबर) को होलसेल प्राइस इंडेक्स यानी थोत महंगाई दर के आंकड़ों को जारी किया।

केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय द्वारा सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, देश की थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति यानी WPI अगस्त में 0.52 प्रतिशत रही, जबकि जुलाई में यह -0.58 प्रतिशत थी और जून में -0.19% रही थी। इसके साथ देश में थोक महंगाई 4 महीने के हाई पर पहुंच गई जबकि दो महीने बाद पॉजिटिव हुई है। मई में थोक महंगाई 0.39 फीसदी जबकि अप्रैल में 0.85% रहा था।
पिछले साल अगस्त 2024 में थोक महंगाई दर 1.25% थी। थोक महंगाई दर में इजाफा होने का प्रमुख कारण खाद्य पदार्थों, गैर-खाद्य सामान, मैन्युफैक्चर्ड वस्तुओं, खनिज उत्पादों और ट्रांसपोर्ट उपकरणों का रेट बढना है।
किस सेगमेंट में कितनी बढ़ी महंगाई?
डब्ल्यूपीआई आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में खाद्य पदार्थों में अपस्फीति (डिफ्लेशन) 3.06 प्रतिशत रही जबकि जुलाई में यह 6.29% थी। अगस्त में सब्जियों में अपस्फीति 14.18% थी, जबकि जुलाई में यह 28.96% थी। जुलाई में -2.15 प्रतिशत तक गिरने के बाद, खाने-पीने की चीजों की थोक मुद्रास्फीति वार्षिक आधार पर बढ़कर 0.21 प्रतिशत हो गई। वहीं, कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस की थोक मुद्रास्फीति अगस्त 2025 में -9.87 प्रतिशत बढ़ी, जबकि पिछले वर्ष इसी महीने में इसमें 1.77 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी।
प्राइमरी वस्तुओं के सेगमेंट में देखें तो अगस्त में थोक मुद्रास्फीति दर पिछले महीने के -4.95 प्रतिशत से बढ़कर -2.10 प्रतिशत हो गई। मैन्युफैक्चरिंग उत्पादों की कीमतों में पिछले महीने के 2.05 प्रतिशत की गिरावट के मुकाबले 2.55 प्रतिशत की वृद्धि हुई। ईंधन और बिजली की कीमतों में जुलाई के -2.43 प्रतिशत की गिरावट के मुकाबले -3.17 प्रतिशत की गिरावट आई।
दो दिन पहले जारी हुए थे खुदरा महंगाई दर
सरकार ने दो दिन पहले भारत के खुदरा मुद्रास्फीति के आंकड़े भी जारी किए थे जिनसे पता चला कि वार्षिक आधार पर अगस्त में यह जुलाई के 1.55 प्रतिशत की तुलना में बढ़कर 2.07 प्रतिशत हो गई। पिछले सप्ताह जारी आंकड़ों से पता चला है कि नवंबर 2024 से नौ महीने तक गिरावट के बाद, खुदरा मुद्रास्फीति अगस्त में बढ़कर 2.07 प्रतिशत हो गई, जो कि सब्जियों, मांस, मछली और अंडे जैसी रसोई की वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि के कारण हुई।


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