नयी दिल्ली। क्या आप दुनिया की सबसे महंगी सब्जी के बारे में जानते हैं? इस सब्जी का नाम है हॉपशूट्स। दिखने में घास की तरह लगने वाली इस सब्जी के एक किलोग्राम की कीमत लगभग 1 लाख रुपये है। अब दुनिया की सबसे महंगी सब्जी की खेती बिहार के औरंगाबाद जिले में एक परीक्षण के आधार पर शुरू की गयी है। भारत में दुनिया की सबसे महंगी सब्जी की खेती दोबारा शुरू की गयी है। आइए जानते हैं कौन करने जा रहा है भारत में फिर से इस सब्जी की खेती की शुरुआत।
बिहार से हॉपशूट्स की खेती करने वाला पहला भारतीय
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार 2012 में हजारीबाग के सेंट कोलंबस कॉलेज से इंटरमीडिएट-पास, बिहार के औरंगाबाद जिले के नवीनगर में आने वाले करमडीह गाँव के 38 वर्षीय किसान अमरेश सिंह ने अपनी जमीन के 5 कट्ठे में हॉप-शूट्स की खेती शुरू की है। वे पहले भारतीय हैं जो हॉपशूट्स की खेती की शुरुआत कर रहा है।
ऑर्डर करने पर ही मिलती है ये सब्जी
यह सब्जी अंतरराष्ट्रीय बाजारों में छह साल पहले भी 1000 पाउंड प्रति किलोग्राम पर बेची जाती थी। 1000 पाउंड लगभग 1 लाख रुपये बनते हैं। हॉपशूट्स भारतीय बाजार में कम ही देखी जाती है और इसे केवल एक विशेष ऑर्डर देकर ही खरीदा जा सकता है। अमरेश के अनुसार इसकी 60 प्रतिशत से अधिक खेती सफलतापूर्वक हुई है। वे कहते हैं कि यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हॉपशूट्स की खेती को बढ़ावा देने के लिए खास व्यवस्था करते हैं तो इससे किसानों को कुछ वर्षों में अन्य चीजों की खेती की तुलना में 10 गुना अधिक कमाई होगी।
आएगा बड़ा बदलाव
बता दें कि वाराणसी में स्थित भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान के कृषि वैज्ञानिक डॉ लाल की देखरेख में हॉप-शूट्स (हमुलस-ल्यूपुलस) की खेती चल रही है। अमरेश ने वाराणसी में मौजूद भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान से लाए जाने के बाद दो महीने पहले इस सब्जी के पौधे लगाए हैं। उन्हें उम्मीद है कि यह कामयाब होगी और बिहार में कृषि में एक बड़ा बदलाव लाएगी।
किस काम आती है हॉपशूट्स
हॉप-शूट का फल, फूल और टहनी सभी का उपयोग पेय उत्पाद बनाने और एंटीबायोटिक दवाएं बनाने में किया जाता है। इस वनस्पति के तने से बनी दवा को टीबी के इलाज में भी किया जाता है। इसके फूल को हॉप-कोन्स या स्ट्रोबाइल कहा जाता है। बाकी टहनियों का उपयोग भोजन और दवा के लिए किया जाता है। इस सब्जी में एंटीऑक्सिडेंट भी होता है, इसलिए जड़ी-बूटी के रूप में हॉप-शूट का उपयोग यूरोपीय देशों में भी लोकप्रिय है, जहां इसका उपयोग त्वचा को चमकदार और यंग बनाए रखने के लिए किया जाता है।
कब हुई थी खोज
हॉप-शूट की खोज 11वीं शताब्दी में हुई थी। हर्बल चिकित्सा में इसके उपयोग के बाद धीरे-धीरे इसे एक सब्जी के रूप में भी इस्तेमाल किया जाने लगा। शूट में ह्यूमलोन और ल्यूपुलोन नामक एक एसिड होता है, जो मानव शरीर में कैंसर कोशिकाओं को मारने के लिए प्रभावी माना जाता है। ये सब्जी पाचन तंत्र में सुधार करती है और अवसाद, चिंता से पीड़ित लोगों के लिए आरामदायक होती है। ये अनिद्रा को भी ठीक करती है। हॉपशूट की खेती यूरोपीय देशों जैसे ब्रिटेन, जर्मनी और अन्य में की जाती है। भारत में पहले हिमाचल प्रदेश में इसकी खेती की गयी थी, लेकिन अधिक कीमत की वजह से ये ज्यादा नहीं चल पाई।
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