नयी दिल्ली। वर्ल्ड बैंक का मानना है कि भारत की अर्थव्यवस्था ने पिछले एक साल में कोरोना महामारी और लॉकडाउन से आश्चर्यजनक रूप से रिकवरी की है। मगर यह अभी भी पूरी तरह से पटरी पर नहीं लौटी है। इस बात का जिक्र वर्ल्ड बैंक ने अपनी एक लेटेस्ट में रिपोर्ट किया है। वर्ल्ड बैंक ने यह भी अनुमान लगाया है कि वित्त वर्ष 2021-22 में भारत की रियल जीडीपी ग्रोथ 7.5-12.5 फीसदी के दायरे में रह सकती है। वाशिंगटन स्थित वैश्विक कर्जजाता ने विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की एनुअल स्प्रिंग मीटिंग से पहले जारी अपनी लेटेस्ट साउथ एशिया इकोनॉमिक फोकस रिपोर्ट में कहा कि जब कोविड-19 महामारी सामने आई तो भारत की अर्थव्यवस्था पहले से ही सुस्त थी।

घटी है भारत की विकास दर
वर्ल्ड बैंक ने कहा कि वित्त वर्ष 2017 में 8.3 प्रतिशत तक पहुंचने के बाद, वित्त वर्ष 2019-20 में भारत की विकास दर घट कर 4.0 प्रतिशत पर पहुंच गई। इस मंदी का कारण प्राइवेट खपत ग्रोथ में कमी और वित्तीय क्षेत्र (एक बड़े नॉन-बैंक फाइनेंशियल इंस्टिट्यूशन में गड़बड़ी) को लगा झटका था, जिसने निवेश में पहले से मौजूद कमजोरियों को और बल दिया।
आगे ग्रोथ किस चीज पर होगी आधारित
वर्ल्ड बैंक ने वित्त वर्ष 2021-22 के लिए 7.5-12.5 फीसदी रियल जीडीपी की ग्रोथ का अनुमान लगाया है। मगर ये वैक्सीनेशन, नये प्रतिबंध और इकोनॉमी कितनी जल्दी पटरी पर लौटती है, पर निर्भर होगा। वर्ल्ड बैंक के एक अधिकारी के अनुसार यह आश्चर्यजनक है कि भारत एक साल पहले की तुलना में कितना आगे आ गया है। यदि आप एक साल पहले देखें तो 30 से 40 प्रतिशत आर्थिक गतिविधियों में गिरावट थी, जिससे भारी मंदी की संभावना थी। तब वैक्सीनेशन के बारे में कोई स्पष्टता नहीं थी और महामारी को लेकर अनिश्चितता बहुत अधिक थी।


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