आईएमएफ-विश्व बैंक ने कहा, गरीब देशों से फिलहाल कर्ज की वसूली न करें।
नई दिल्ली: आईएमएफ-विश्व बैंक ने कहा, गरीब देशों से फिलहाल कर्ज की वसूली न करें। जी हां अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक ने बुधवार को सरकारों से दुनिया के सबसे गरीब देशों से ऋण भुगतान पर पकड़ बनाने का आह्वान किया ताकि वे कोरोनोवायरस महामारी से लड़ सकें। वाशिंगटन स्थित विकास ऋणदाताओं ने एक संयुक्त बयान में कहा कि विश्व बैंक समूह और आईएमएफ का मानना है कि विकासशील देशों के लिए और साथ ही वित्तीय बाजारों के लिए एक मजबूत संकेत देने के लिए इस समय यह अनिवार्य है। यह कदम उन देशों पर निर्देशित है जो आईडीए" फंड से सबसे उदार सहायता के लिए अर्हता रखते हैं, जिसका उद्देश्य दुनिया की अत्यधिक गरीबी में रहने वाले दो-तिहाई लोग हैं।

इससे पहले आईएमएफ की अध्यक्ष ने कहा था कि कोरोना वायरस से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैली महामारी से उत्पन्न परिस्थियों का सामना करने के लिए सरकारों का एक साथ मिल कर काम करना जरूरी है। वहीं उन्होंने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को इस संकट से संभालने के लिए मिल कर उसी तरह से जोरदार तरीके से खर्च करने की जरूरत है जैसा 2008 के वित्तीय संकट के समय किया गया था।
जानकारी दें कि इस संदर्भ में आईएमएफ प्रमुख ने ब्लॉग लिखा, जिसमें बताया कि इस समय उभरते बाजारों वाली अर्थव्यवस्थाओं को भी मदद की जरूरत है क्योंकि उनके यहां से इस समय नकद धन की बहुत अधिक निकासी हो रही है। वहीं उन्होंने कहा है वायरस के प्रसार को देखते हुए देशों के व्यक्तिगत प्रयासों के भी आगे बढ़ कर इस समय वैश्विक स्तर पर एक समन्वित और सुचारू वित्तीय प्रोत्साहन की आवश्यकता का अधिक सशक्त तर्क बनता है।
जानकारी दें कि वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के चलते दुनिया थमने के कगार पर पहुंच चुकी है। तेजी से आते नए मामलों और लगातार बढ़ती मृतकों की संख्या से पूरा विश्व जूझ रहा है। अब तक 21,000 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। कोरोना को और फैलने से रोकने के लिए 200 करोड़ से अधिक लोगों को उनके घरों में कैद कर दिया गया है। यानी दुनिया की 20 फीसदी आबादी घरों में रहने को मजबूर है। यूरोप समेत कई देशों ने अपनी सीमाएं सील कर आवाजाही पूरी तरह से रोक दी है। भारत ही नहीं, इटली, स्पेन और फ्रांस समेत दो दर्जन देशों में लॉकडाउन है।


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