नई दिल्ली, सितंबर 21। आपने सुना ही होगा कोई भी व्यापार विश्वास पर टिका होता है। जिस प्रोडक्ट में जनता का विश्वास बन जाता हैं तो फिर उस प्रोडक्ट की मार्केट में मांग बहुत अधिक बढ़ जाती हैं। जैसे जब भी जूतों की मजबूती की बात आती हैं तो एक नाम हमेशा सामने आता हैं वो नाम हैं वुडलैंड। बहुत सारे लोग वुडलैंड के जूते को शौक के तौर पर खरीदते हैं। इस जूते का शौक खत्म हो जाता है। मगर जूते टूटते नहीं हैं। आज हम आपको इसकी सफलता की कहानी बताने वालें हैं। कैसे एक भारतीय ने रूसी जूतों पर भारत की मुहर लगाई। उन्होंने केवल 3 दुकानें खोली थी भारत में और इसको पूरी दुनिया में फेमस कर दिया।
रूस के लिए जूते भारत बनाता था
जूतों के मार्केट में 1990 के दशक की बात करें तो केवल दो ही नाम बहुत अधिक प्रसिद्ध थे। उसमें पहला नाम हैं। बाटा और दूसरा नाम करोना था। ये वही कंपनी थी वुडलैंड जिसने इन दोनों कंपनी के किले में सेंध लगाई और वे भारतीय मार्केट में उतरे हैं और अपनी जगह बनाई। एक व्यक्त था जब भारत। दिल्ली के एरो क्लब में अपने सबसे बड़े व्यापार साझेदार के रूप में रूस के लिए जुटे बनाता था। इसके बाद जब सोवियत संघ का विघटन वर्ष 1992 में हुआ। ये मार्केट बिखर गया। इसका नतीजा यह हुआ। कि रूस की तरफ से जितने ऑर्डर मिले थे। सारे ऑर्डर रद्द हो गए।
खोजे अवतार सिंह ने स्पेशल शू
उस व्यक्त एरो क्लब के चेयरमैन अवतार सिंह के लिए रूस के बाजार के लिए बनाए गए लेदर के कैजुअल शूज इंडस्ट्रियल बूट्स का स्टॉक एक बेहद ही बड़ा सिर दर्द बना हुआ था। हालांकि इसी समस्या ने उन्हे बहुत बड़ा लाभ दिलाया जिसकी चर्चा आज भी होती हैं। अवतार सिंह की नजर इन जूते में पड़े एक रफ टफ जूते में पड़ी। जिस जूते को रूस के मौसम के लिए खास तौर पर डिजाइन किया गया था। ये मोटे बफ लेदर से सिला हुआ हैंड मेड जूता था। इस जूते की लुक को रफ टफ रखा हुआ था। और ये जूता अधिक व्यक्त तक चलने वाला चल रहा था।
मार्केट में आया वुडलैंड
कनाडा के क्यूबेक में अवतार सिंह रहते थे। उन्होंने वुडलैंड की पेरेंट कंपनी एयरो क्लब की स्थापना वर्ष 1980 में कनाडा के क्यूबेक में की थी। मगर मूल रूप से अवतार सिंह भारत से हैं। उन्होंने जो जूते रूस के लिए रखे थे उन्होंने उन जुतो में से रफ एंड टफ जूतों को निकाल कर उसमे वुडलैंड लेबल लगाया और मार्केट में उतार दिया। उस जूते के मार्केट में आते ही वुडलैंड ने बाटा जैसी कंपनी को टक्कर देने शुरू कर दी।
शुरुआत हुई थी 2–3 स्टोर्स से
इस जूते को उन्होंने देश में यानी भारत में बेचने का फैसला किया। उन्होंने इन जूते को वुडलैंड ब्रांड के नेम के साथ एरो क्लब के 2 से 3 स्टोर्स पर लॉन्च किया। जो जूतों के शौकीन है उन लोगों तक सीधा पहुंचने के लिए दिल्ली के कुछ छोटे रिटेलर्स को जूते कमिशन के आधार पर बेचने के लिए दिए। अवतार सिंह ने इन जूते को स्टाइल नंबर दिया, जिस-0092, इसका मतलब 1992 और जी का मतलब जेंट्स शूज था। पैसे का पूरा मूल्य वसूल करने वाले ग्राहकों ने । देश में वुडलैंड जी-0092 को काफी अधिक पसंद किया।
उनका करोड़ों का कारोबार हैं आज
देश में वुडलैंड के प्रमुख निर्माण केंद्र की बात करें तो इसकी देश में प्रमुख निर्माण केंद्र नोएडा में हैं। चमड़े के सोर्स की बात करें तो ये पंजाब के जालंधर में टेनरियों से सोर्स किया जाता है। देश में वुडलैंड की कुल 8 फैक्ट्रियां हैं। जो हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में हैं। जो 70 प्रतिशत डिमांड को पूरी करती है। आज के समय वुडलैंड के लगभग 350 एक्सक्लूसिव शोरूम हैं। 5 से ज्यादा आउटलेट्स है और इस कंपनी के कारोबार की बात करें तो 1250 करोड़ रु का कारोबार करती हैं।
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