Pear Shaped Diamond : अकसर दुनिया में कुछ खास हीरे पाए जाते हैं। ऐसे हीरों में पिंक डायमंड भी शामिल है। इन हीरों को नीलामी में बेचा जाता है। जैसे कि मध्य प्रदेश के पन्ना में जब हीरा मिलता है तो उसे हीरा दफ्तर में जमा करा दिया जाता है और फिर उसकी नीलामी होती है। एक ऐसे ही नायाब हीरे की नीलामी हुई है। यह हीरा बेहद खास है। आगे जानते हैं इसके बारे में विस्तार।

नाशपाती के आकार का डायमंड
जिस हीरे के बारे में हम बात करने जा रहे हैं, वो है नाशपाती के आकार का। यही इसकी सबसे बड़ी खासियत है, जो इसे काफी दुर्लभ बनाती है। इस हीरे की जेनेवा (स्विट्ज़रलैंड) में नीलामी हुई। नाशपाती के आकार का यह हीरा 18.18 कैरेट का है। इसे एक यूनीक नाम भी दिया गया है। इसे 'फॉर्यून पिंक' नाम दिया गया है।
कितने में हुई नीलामी
फॉर्यून पिंक डायमंड की नीलामी 28.4 लाख स्विस फ्रैंक में हुई है। ये 28.5 लाख डॉलर होते हैं। भारतीय मुद्रा में यह रकम 23.29 करोड़ रु बनती है। जिस व्यक्ति ने इस हीरे को खरीदा है, वो एक एशियाई है। आप सोच रहे होंगे कि भला यह हीरा इतना महंगा क्यों बिका। असल में यह डायमंड दुर्लभतम कैटेगरी का है, यानी बहुत कमी के साथ पाया जाता है।

सबसे बड़ा डायमंड
जिस इवेंट में इस यूनीक हीरे को नीलाम किया गया, उसकी ऑर्गेनाइजर का नाम क्रिस्टी। रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने बताया कि यह हीरा अब तक का चमकीले पिंक रंग और नाशपाती के आकार वाला अब तक का सबसे बड़ा डायमंड है।
कहां मिला था ये हीरा
इस फॉर्च्यून पिंक नामक हीरे को ब्राजील में खुदाई के दौरान खोजा गया था और वो भी 15 साल पहले। अनुमान था कि यह हीरा 25 लाख डॉलर से 35 लाख डॉलर के बीच की कीमत पर बिक सकता है। यह अनुमान सही साबित हुआ, क्योंकि यह हीरा 28.5 लाख डॉलर में बिका है।
क्यों मिला फॉर्च्यून पिंक नाम
जैसा कि हमने ऊपर जिक्र किया कि ये हीरा 18.18 कैरेट का है। एशिया में माना जाता है कि यह हीरा काफी भाग्यशाली है, इसीलिए इसे एक एशियाई ने काफी अधिक कीमत पर खरीद लिया है। भाग्यशाली माने जाने के कारण ही इसे फॉर्च्यून पिंक नाम दिया गया है।

भारत में मिला था इस तरह का पहला हीरा
इस हीरे की नीलामी जिस होटल में हुई वो होटल है डेस बर्गेस, जो कि जेनेवा में स्थित है। गौरतलब है कि हीरे की नीलामी के लिए बेस प्राइज 17 लाख डॉलर था। नीलामी की बोली बढ़ते बढ़ते 28.5 लाख डॉलर तक पहुंची। इस डायमंड को सबसे पहले जेनेवा में ही डिस्प्ले किया गया था। फिर शोरूम टूर के तहत इसे न्यूयॉर्क, शंघाई, ताइवान और सिंगापुर ले जाता गया। आखिर में अक्टूबर में स्विट्जरलैंड में ही फिर से वापस लाया गया। पिंक डायमंड बहुत दुर्लभ रत्न होता है। ये उन रत्नों में से एक है, जो बहुत कम मिलते हैं। इसीलिए ये नीलामी में बहुत महंगे भी बिकते हैं। इस तरीके का पहला पिंक डायमंड भारत के गोलकुंडा में एक खदान में मिला था। बताया जाता है कि 16वीं शताब्दी की बात है।


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