नयी दिल्ली। देश की प्रमुख आईटी कंपनियों में से एक विप्रो ने जुलाई-सितंबर तिमाही के वित्तीय नतीजे घोषित कर दिए हैं। पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले विप्रो के मुनाफे में 3.40 फीसदी की गिरावट आई है। 2019 की जुलाई-सितंबर तिमाही में कंपनी को 2,552.70 करोड़ रु का मुनाफा हुआ था, जबकि इस साल समान अवधि में ये घट कर 2,465.70 करोड़ रु रह गया। बता दें कि विप्रो के इससे ज्यादा मुनाफा कमाने का अनुमान लगाया गया था।

इनकम भी घटी
विप्रो की इनकम भी घटी है। कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 15,125.60 करोड़ रु से 0.07 फीसदी की मामूली गिरावट के साथ 15,114.50 करोड़ रु रहा। विप्रो ने शेयर बायबैक का भी ऐलान किया है। विप्रो के बोर्ड ने भी शेयरधारकों को मुनाफा पहुंचाने के लिए 9,500 करोड़ रुपये के शेयर वापस खरीदने (शेयर बायबैक) प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। आईटी फर्म 400 रुपये प्रति शेयर पर 23.75 करोड़ शेयर वापस करेगी। बायबैक का साइज इसकी कुल पेड-अप इक्विटी शेयर पूंजी का 4.16 प्रतिशत है। कंपनी के प्रमोटर और प्रमोटर ग्रुप भी प्रस्तावित बायबैक में भाग लेंगे।
विप्रो के शेयर में आई गिरावट
विप्रो ने शेयर बाजार बंद होने के बाद नतीजों का ऐलान किया। कंपनी का शेयर 377.55 रु के पिछले बंद स्तर के मुकाबले 378.00 रु पर खुला। कारोबार के दौरान विप्रो का शेयर सिर्फ 381.70 रु तक ऊपर जा सका और आखिर में 1.80 रु या 0.48 फीसदी की गिरावट के साथ 375.75 रु पर बंद हुआ। इस स्तर पर कंपनी की मार्केट कैपिटल 2,14,739.28 करोड़ रु है।
क्या होता है बायबैक
बता दें कि जब कोई कंपनी शेयरधारकों से अपने शेयर वापस खरीदती है तो इसे बायबैक कहते हैं। बायबैक प्रोसेस पूरी होने पर वापस खरीदे गए शेयरों का वजूद खत्म हो जाता है। कंपनियां कई कारणों से बायबैक करती हैं, जिनमें बैलेंस शीट में अतिरिक्त नकदी का होना शामिल है। असल में किसी कंपनी के पास ज्यादा कैश होना अच्छा नहीं माना जाता। कई बार कंपनी के शेयर की कीमत कम यानी अंडरवैल्यूड हो जाती है तो वह बायबैक के जरिये उसे बढ़ाने की कोशिश करती है। इससे निवेशकों को फायदा होता है। जैसे आज विप्रो का शेयर 375 रु पर है, मगर कंपनी वापस खरीदेगी 400 रु में। यानी हर शेयर पर सीधा-सीधा 25 रु का फायदा।


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