नयी दिल्ली। कोरोनावायरस को काबू में रखने के लिए देश भर में लगाए गए लॉकडाउन के बीच विप्रो वित्तीय नतीजे पेश करने वाली पहली बड़ी कंपनी है। विप्रो ने वित्त वर्ष 2019-20 की चौथी तिमाही यानी जनवरी-मार्च तिमाही के फाइनेंशियल रिजल्ट घोषित कर दिए हैं। तिमाही दर तिमाही आधार पर विप्रो के मुनाफे में गिरावट दर्ज की गई है। 2019 की अक्टूबर-दिसंबर में 2,455.9 करोड़ रुपये के मुकाबले 2020 की जनवरी-मार्च तिमाही कंपनी का शुद्ध मुनाफा 5.3 फीसदी की गिरावट के साथ 2,326.1 करोड़ रुपये रह गया। हालांकि इस दौरान प्रमुख सॉफ्टवेयर सर्विस प्रोवाइडर विप्रो की आईटी सर्विस आमदनी 15,100.6 करोड़ रुपये के मुकाबले 1.3 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 15,296 करोड़ रुपये रही। एक खास बात और विप्रो के रिजल्ट में रही। कंपनी ने कोरोनावायरस महामारी के प्रभाव को देखते हुए अप्रैल-जून तिमाही के लिए अपने रेवेन्यू के लिए कोई गाइडेंस जारी नहीं किया है।

मुश्किल समय में अच्छा प्रदर्शन
विप्रो के सीईओ और प्रबंध निदेशक आबिदअली जेड. नीमचवाला ने इस मौके पर कहा कि इन अभूतपूर्व समय में मुझे इस बात पर बेहद गर्व है कि विप्रो टीम एक साथ आगे आई और अपने ग्राहकों की सेवा करते हुए एक-दूसरे की सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित करने के लिए 24/7 काम किया। हमें उम्मीद है कि कठिन समय के दौरान हम सभी सुरक्षित और मजबूत रहेंगे। बता दें कि विप्रो के आईटी सर्विस एबिट (EBIT या Earnings before interest and taxes) 2773.6 करोड़ रुपये से 2.9 फीसदी घट कर 2692.5 करोड़ रुपये रह गया।
नहीं लिया डिविडेंड पर फैसला
विप्रो की आईटी सर्विस डॉलर आमदनी भी इस दौरान 209.48 करोड़ डॉलर के मुकाबले 1 प्रतिशत गिर कर 207.37 करोड़ डॉलर रह गई। बोर्ड ने किसी अंतिम लाभांश (डिविडेंड) की सिफारिश नहीं की है। जनवरी में बोर्ड द्वारा घोषित 1 रुपये के अंतरिम लाभांश को वित्तीय वर्ष 2019-20 के लिए अंतिम लाभांश माना जाएगा। इससे पहले विप्रो के अक्टूबर-दिसंबर मुनाफे में 3.2 फीसदी गिरावट आयी थी। 2018 की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में 2,544.4 करोड़ रुपये के मुकाबले 2019 की समान तिमाही में विप्रो ने 2,462.90 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था।


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