Budget 2025: भारत सरकार ने जुलाई 2024 में जब अपना 3.0 का पहला पूर्ण बजट पेश किया था, तो उस समय गोल्ड पर इंपोर्ट ड्यूटी को कम करने का फैसला लिया था। सरकार के इस फैसले के बाद आम लोगों को बड़ी राहत मिली थी।
हालांकि, इसके बाद सोने के भाव में भारी गिरावट आई थी, लेकिन एक बार फिर सोने के दाम ने रफ्तार पकड़ ली जोकि अब 80,000 के पार जा चुका है, तो क्या इस बार बजट में सरकार सोने के भाव को कम करने पर विचार करेगी।

सोना के दाम इन दिनों भारी उतार चढ़ाव के कारोबार के साथ आपको पता होना चाहिए। भारतीय सराफा बाजार में इन दिनों सोने का भाव 82000 रुपए प्रति 10 ग्राम के पार निकल गया है। हालांकि, सोने के खरीदार हमेशा सोने के भाव कम होने का इंतजार करते हैं लेकिन इन दिनों गोल्ड भारी उछाल के साथ कारोबार कर रहा है।
भारत सरकार ने वित्त वर्ष 2024-25 में पूर्ण बजट पेश किया था, उस समय गोल्ड पर इंपोर्ट ड्यूटी को घटा दिया गया था। हालांकि, इसका फायदा सराफा बाजार में देखने को मिला था, क्योंकि गोल्ड के रेट 80,000 रुपए के नीचे फिसल गए थे। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को 2025-26 के लिए केंद्रीय बजट पेश करेंगी।
यह उनका आठवां बजट होगा। जैसे-जैसे बजट का इंतज़ार बढ़ रहा है, कई लोग यह देखने के लिए उत्सुक हैं कि बजट से क्या लाभ हो सकते हैं। एक बार फिर सबकी नजर निर्मला सीतारमण पर रहने वाली हैं, क्या वो सोने के भाव को कम करने पर जोर देने वाली हैं, जिससे सीधे आम आदमी को फायदा मिलेगा।
ज्वैलरी और बुलियन कारोबारी चाहते हैं कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण सोने के भाव कम करने पे दवाब बनाएंगी, ताकि लाभ सीधे लोगों को मिल सके। ईटी की रिपोर्ट के अनुसार भारत सरकार ईएमआई पर सोना खरीदने का कोई मैकेनिज्म का प्लान बना सकती है। वहीं एक्सपर्ट के बीच गोल्ड का कारोबार स्टैंडर्ड बनाने के लिए एक सिंगल रेग्युलेटर की जरूरत को महसूस किया जा रहा है।
ये है सिंगल गोल्ड रेग्युलेटर
इस समय अगर नजर डालें तो गोल्ड का कारोबार अलग-अलग माध्यम से किया जाता है। डिजिटल गोल्ड, फिजिकल गोल्ड और गोल्ड ईटीएफ के जरिए से सोने का लेनदेन किया जा रहा है। भारतीय प्रतिभूति विनियामक बोर्ड (सेबी) भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और डायरेक्टर जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड (डीजीएफटी) शामिल हैं, जो इसको अलग-अलग रेग्युलेटर करते हैं। वहीं इसके साथ ही भारत सरकार में वित्त मंत्रालय और वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय भी गोल्ड के कारोबार पर अपनी नजर रखते हैं।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि गोल्ड के कारोबार को रेग्युलेट करने के लिए एक सिंगल रेग्युलेटर होना चाहिए। क्योंकि गोल्ड के रेट तय करने में आसानी होगी। इस चीज को तय करने से देश में सोने के भाव में एकरुपता भी आएगी।
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