नई दिल्ली, जून 13। रुपया तेजी से गिर रहा है और लगातार गिर रहा है। विदेशी मुद्रा बाजार में आज घरेलू मुद्रा 77.85 प्रति अमेरिकी डॉलर के पिछले बंद के मुकाबले 78.12 पर खुली। इस समय रुपया डॉलर के मुकाबले 78.24 पर है। मगर सवाल यह है कि रुपया क्यों गिर रहा है। सबसे बड़ा कारण घरेलू शेयर बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों द्वारा की जा रही भारी बिकवाली का दबाव है। 20 मई 2022 तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने भारतीय इक्विटी बाजार से 1,62,299 करोड़ रुपये निकाले। बिकवाली थमने का नाम नहीं ले रही है, जिसका करेंसी मार्केट पर भी बुरा असर पड़ रहा है। जब ये निवेशक स्टॉक बेचते हैं, तो वे प्रत्यावर्तन (पैसा अपने देश में भेजना) करते हैं, जिसके लिए अमेरिकी डॉलर खरीदने की आवश्यकता होती है। इससे डॉलर की मांग बढ़ती और नतीजे में रुपये पर दबाव पड़ता है।

ये है दूसरा कारण
दूसरा सबसे बड़ा कारण आयातित कच्चे तेल के भुगतान के लिए डॉलर की मांग की जरूरत होना। यहां दो चीजें हुई हैं : कच्चे तेल का आयात बिल बढ़ने वाला है, क्योंकि तेल की मांग अधिक है और दूसरी बात यह है कि कच्चे तेल की कीमतें भी बढ़ गई हैं। इससे भी भारतीय रुपये पर दबाव पड़ रहा है।
80 का आंकड़ा हो सकता है पार
रुपया 80 के स्तर को पार करेगा या नहीं, यह कहना मुश्किल है। घरेलू शेयर बाजारों में एफपीआई के बिकवाली के दबाव से रुपये में गिरावट आ सकती है। एमके ग्लोबल के अनुसार फेड अधिकारी सितंबर के बाद दरों में बढ़ोतरी का संकेत देना शुरू कर सकते हैं और उस मामले में अमेरिकी डॉलर 105 डॉलर के स्तर की ओर बढ़ जाएगा। इसके विपरीत मुद्रास्फीति में गिरावट से डॉलर में 99 डॉलर के स्तर पर और गिरावट आएगी। अगर 77.80 के आसपास का स्तर लगातार टूटना शुरू हो जाता है तो रुपये में गिरावट आ सकती है। यह रुपये के लिए 78.25 के लक्ष्य का रास्ता खोलेगा।


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