स्टॉक मार्केट रेगुलेटर सेबी ने कई निवेशकों के उम्मीदों पर पानी फेर दिया है. भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड यानी SEBI ने मंगलवार को डेरिवेटिव्स (F&O) सेगमेंट में ट्रेडिंग के समय को बढ़ाने को लेकर सभी प्रस्तावों को खारिज कर दिया है. एनलिस्ट कॉल में खुद NSE के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO आशीष चौहान ने इसकी जानकारी दी है. उन्होंने कहा कि मार्केट रेगुलेटर ने एक्सचेंज की ओर से भेजे गए सभी प्रपोजल को खारिज कर दिया. इसकी वजह ब्रोकर्स कम्युनिटी में कम उत्साह रही. क्योंकि NSE के इस प्रस्ताव को ब्रोकर्स से मिलाजुला रिस्पांस मिला.
SEBI ने दिया ट्रेडर्स को झटका?
आशीष चौहान ने सोमवार को कहा कि सेबी से प्रस्ताव को खारिज किए जाने के बाद टाइमिंग बढ़ाने को लेकर कोई योजना नहीं है. उन्होंने कहा कि SEBI को डेरिवेटिव्स सेगमेंट में ट्रेडिंग की टाइमिंग को बढ़ाने को लेकर ब्रोकर्स की ओर से अच्छा फीडबैक नहीं मिला. इसमें सभी ब्रोकर्स सपोर्ट में नहीं आए. इसकी वजह अतिरिक्त कॉस्ट और तकनीकि जरूरतें रहीं. बता दें कि पिछले साल सितंबर में एक्सचेंज ने सेबी को एक प्रस्ताव भेजा था, जिसमें डेरिवेटिव्स सेगमेंट में ट्रेडिंग टाइम 3 घंटे से ज्यादा बढ़ाने की मांग की गई.
NSE का प्लान हुआ फेल?
NSE ने मार्केट रेगुलेटर को भेज अपने प्रस्ताव में F&O ट्रेडिंग टाइम को शाम को बढ़ाने की मांग की, जिसमें शाम 6 से 9 बजे तक की डिमांड की गई थी. आगे एक्सचेंज का प्लान मार्केट के रेगुलर क्लोजिंग टाइमिंग के ब्रेक के बाद इसे बढ़ाकर साढ़े 11 बजे तक करने का था. NSE ने आगे आखिरी और तीसरे चरण में कैश मार्केट के लिए ट्रेडिंग समय बढ़ाने का भी प्लान किया था. इसके तहत ट्रेडिंग टाइम शाम 5 बजे तक करने का प्रस्ताव था.

टाइम बढ़ने से मिलता फायदा?
एक्सचेंज के इस प्रस्ताव को एसोशिएशन ऑफ नेशनल एक्सचेंज मेंबर्स ऑऱ इंडिया यानी ANMI ने मंजूर किया. खास बात ये है कि कमोडिटी मार्केट में साढ़े 3 बजे के बाद ट्रेडिंग का फायदा मिल सकता है. ICICI Direct ने मार्च 2022 में ब्लॉग में बताया था कि करेंसी और कमोडिटी डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग का समय बढ़ाने से ट्रेडर्स को मार्केट मूवमेंट्स और ग्लोबल मार्केट के ट्रेंड्स को पकड़ने में फायदा मिलता है.


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