Reliance Industries share price: कारोबार के दौरान आज रिलायंस के शेयरों में गिरावट आई। मंगलवार के ट्रेडिंग सेशन में, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के शेयर 5% से ज्यादा गिरकर BSE पर इंट्राडे लो 1,497.05 रुपये पर आ गए। स्टॉक ने बड़े मार्केट के मुकाबले खराब प्रदर्शन किया और दलाल स्ट्रीट पर कमजोर सेंटिमेंट के बीच बेंचमार्क इंडेक्स पर सबसे बड़े दबाव में से एक बन गया। लेकिन इस तेज गिरावट का कारण क्या था?

रिलायंस शेयरों में क्यों आई गिरावट? (Why Reliance Share is Falling)
तो, असल में हुआ क्या और स्टॉक पर दबाव क्यों आया? कुछ दिन पहले, ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि रूसी कच्चे तेल ले जा रहे तीन टैंकर गुजरात में रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी की ओर जा रहे थे। इस खबर ने जल्द ही निवेशकों का ध्यान खींचा, क्योंकि इस तरह के संभावित डेवलपमेंट का कच्चे तेल की सोर्सिंग और रिफाइनरी मार्जिन पर असर पड़ सकता था।
हालांकि, रिलायंस ने X पर एक ऑफिशियल सफाई देते हुए रिपोर्ट को "पूरी तरह से झूठा" बताया और चिंता जताई कि इससे कंपनी की इमेज को नुकसान पहुंचा है। कंपनी ने साफ किया कि उसकी जामनगर रिफाइनरी को लगभग तीन हफ्तों से कोई रूसी कच्चा तेल नहीं मिला है और जनवरी 2026 में भी ऐसी किसी डिलीवरी की उम्मीद नहीं है। रिलायंस ने यह भी कहा कि उसे इस बात का दुख है कि रिपोर्ट पब्लिश होने से पहले उसके इनकार पर विचार नहीं किया गया।
रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड हाइड्रोकार्बन एक्सप्लोरेशन और प्रोडक्शन, ऑयल से केमिकल्स, रिटेल और डिजिटल सर्विसेज जैसे बिजनेस एक्टिविटीज में लगी हुई है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज पर ब्रोकरेट की राय
- मोतीलाल ओसवाल ने RIL के स्टॉक के लिए 1765 रुपये का प्राइस टारगेट दिया है। ब्रोकरेज ने कहा कि बैटरी मैन्युफैक्चरिंग (और नई एनर्जी के सभी सेक्टर में) में RIL का मुख्य लॉन्ग-टर्म कॉम्पिटिटिव फायदा उसका स्केल, टेक्नोलॉजी के हिसाब से मुश्किल प्रोजेक्ट्स को करने की क्षमता, और एक इंटीग्रेटेड और यूनिक नई एनर्जी इकोसिस्टम है।
- स्विस इन्वेस्टमेंट बैंक UBS ने इस मार्केट हैवीवेट को 'Buy' रेटिंग दी है। UBS ने मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाले इस ग्रुप के शेयर के लिए 1,820 रुपये प्रति शेयर का टारगेट प्राइस दिया है।
अमेरिका-वेनेज़ुएला से रिलायंस इंडस्ट्रीज को फायदा या नुकसान?
ग्लोबल इन्वेस्टमेंट बैंक जेफरीज ने एक नोट में कहा कि रिलायंस इंडस्ट्रीज और ONGC को वेनेज़ुएला के तेल पर US के कब्जे से फायदा हो सकता है। US की बड़ी तेल कंपनियां प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए निवेश कर सकती हैं, और इससे 2027-28 में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव पड़ सकता है, जब तक कि OPEC+ बाजार को बैलेंस करने का फैसला न करे।
जेफरीज ने बताया कि US के बैन हटने से रिलायंस को फायदेमंद वेनेज़ुएला का कच्चा तेल खरीदने की इजाजत मिल जाएगी, और ONGC को 500 मिलियन डॉलर का बकाया डिविडेंड मिल सकता है।
जेफरीज ने आगे कहा कि रिलायंस ने पहले भी अपनी रोजाना की कच्चे तेल की जरूरत का 20% PDVSA (वेनेज़ुएला की सरकारी तेल और गैस कंपनी) से खरीदा है, और यह ब्रेंट के मुकाबले 5-8/bbl डॉलर के डिस्काउंट पर सप्लाई का टाई-अप कर सकती है, जिससे आगे चलकर उसके ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन (GRMs) को फायदा हो सकता है।
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