Why Natural Gas Price In America Suddenly Rising? अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा टैरिफ को लेकर लिए गए हालिया फैसलों के बीच नेचुरल गैस की कीमतों में अचानक जबरदस्त तेजी देखी जा रही है। मंगलवार को अमेरिकी नेचुरल गैस की कीमतों में तेज़ी से उछाल आया, जिसमें फ्रंट-मंथ फ्यूचर्स लगभग 13% बढ़कर लगभग $3.05 प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट हो गए, जो इस सर्दी में एक दिन की सबसे बड़ी बढ़ोतरी में से एक है।

गैस की कीमतों में यह तेज़ी इस मायने में भी खास है जब तेल और धातुओं में मामूली बढ़ोतरी हुई है, जो यह दिखाता है कि नेचुरल गैस का बाज़ार मौसम, स्टोरेज की कमी और डिमांड में अचानक बदलाव के प्रति कितना संवेदनशील है।
अमेरिका में गैस की बढ़ी कीमतों को असर भारत समेत अन्य देशों पर देखने को मिल सकता है। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि आखिर अमेरिका में अचानक गैस की कीमतों में बढ़ोतरी के क्या कारण हैं और भारत में इसका क्या असर हो सकता है...
अमेरिका में नेचुरल गैस के दाम बढ़ने के मुख्य कारण
- भीषण ठंड (Arctic Blast): जनवरी 2026 में अमेरिका के बड़े हिस्से में भीषण ठंड और आर्कटिक फ्रीज के कारण हीटिंग (तापमान बनाए रखने) के लिए नेचुरल गैस की मांग में जबरदस्त उछाल आया है।
- उत्पादन में रुकावट (Freeze-offs): अत्यधिक ठंड के कारण कुओं और पाइपलाइनों में तरल पदार्थ जम जाने से उत्पादन बाधित हुआ है, जिसे 'फ्रीज-ऑफ़' कहा जाता है।
- निर्यात में वृद्धि (Record LNG Exports): अमेरिका से लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) का निर्यात रिकॉर्ड स्तर पर बना हुआ है, जिससे घरेलू बाजार में आपूर्ति कम हो गई है।
- स्टोरेज में कमी: गैस के भंडार (Storage) उम्मीद से अधिक तेजी से खाली हुए हैं, जिससे बाजार में आपूर्ति की कमी को लेकर चिंता पैदा हो गई है।
- मार्केट ट्रेडिंग (Short Covering): ट्रेडर्स द्वारा अपनी पोजीशन को तेजी से बदलने (शॉर्ट कवरिंग) के कारण भी कीमतों में 13% से 26% तक की अचानक बढ़ोतरी देखी गई।
भारत पर होने वाले प्रभाव
- महंगा आयात: भारत अपनी जरूरत का लगभग 50% गैस आयात करता है। अमेरिका में बढ़ती कीमतों से भारत के लिए LNG आयात करना महंगा हो जाएगा।
- LPG और CNG की कीमतों पर दबाव: हाल ही में भारत ने अमेरिका के साथ 2026 के लिए एक बड़ी LPG डील की है (भारत की जरूरत का लगभग 10%)। अगर वैश्विक स्तर पर कीमतें ऊपर रहती हैं, तो भारत में कमर्शियल और घरेलू गैस सिलेंडर के साथ-साथ CNG के दाम भी बढ़ सकते हैं।
- सब्सिडी का बोझ: अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उछाल का असर आम जनता पर न पड़े, इसके लिए भारत सरकार को सब्सिडी पर अधिक खर्च करना पड़ सकता है।
- औद्योगिक लागत में वृद्धि: खाद (Fertilizer) और बिजली उत्पादन में नेचुरल गैस का बड़े पैमाने पर उपयोग होता है। गैस महंगी होने से इन क्षेत्रों की उत्पादन लागत बढ़ेगी।
- राहत की उम्मीद: हालांकि अल्पकालिक कीमतें बढ़ी हैं, लेकिन पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, 2026 के अंत तक वैश्विक बाजार में गैस की उपलब्धता बढ़ने से कीमतों में गिरावट आने की उम्मीद भी है।
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