Ali Khamenei के बाद कौन बनेगा ईरान का नया सुप्रीम लीडर? सत्ता की रेस में दो बड़े नाम आगे

मिडिल ईस्ट में हालात अचानक बदल गए हैं। संयुक्त हमलों के बाद ईरान की राजनीति एक बड़े मोड़ पर खड़ी है। देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन की खबर ने पूरे सिस्टम को झकझोर दिया है। कई दशक तक उन्होंने देश की दिशा तय की। अब उनके बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि नई कमान किसे मिलेगी और क्या देश की नीतियों में बदलाव होगा।

Iran Supreme Leader successor

फैसले की जिम्मेदारी किसकी?

ईरान में सुप्रीम लीडर का चुनाव आम वोटिंग से नहीं होता। यह जिम्मेदारी 'विशेषज्ञों की परिषद' नाम की संस्था निभाती है। इसमें 88 वरिष्ठ धर्मगुरु शामिल होते हैं। वही तय करते हैं कि कौन व्यक्ति धार्मिक ज्ञान, अनुभव और नेतृत्व क्षमता के आधार पर इस पद के योग्य है। मौजूदा हालात को देखते हुए परिषद की बैठक अहम मानी जा रही है।

चर्चा में उभरते नाम

राजनीतिक हलकों में दो नाम सबसे ज्यादा सुनाई दे रहे हैं। पहला नाम मोजतबा खामेनेई का है, जिन्हें अपने पिता के करीबी सहयोगी के रूप में देखा जाता रहा है। माना जाता है कि सत्ता के अंदरूनी मामलों में उनकी अच्छी पकड़ है। दूसरा नाम हसन खुमैनी का है। वह देश की इस्लामी क्रांति से जुड़े प्रतिष्ठित परिवार से आते हैं और युवाओं में उनकी अलग पहचान बताई जाती है। हालांकि अभी किसी नाम पर आधिकारिक मुहर नहीं लगी है।

सेना और सुरक्षा की चुनौती

ईरान की ताकत सिर्फ राजनीतिक पद तक सीमित नहीं है। देश की सबसे प्रभावशाली सैन्य संस्था इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स सीधे सुप्रीम लीडर को रिपोर्ट करती है। हालिया हमलों के बाद इस संगठन की भूमिका और भी अहम हो गई है। नए नेता के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि वह सेना का भरोसा बनाए रखे और देश की सुरक्षा को मजबूत रखे।

बढ़ता क्षेत्रीय तनाव

हमलों में इजरायल और संयुक्त राज्य अमेरिका की भूमिका को लेकर ईरान में गुस्सा देखा जा रहा है। कड़े बयानों और संभावित जवाबी कदमों की चर्चा ने पूरे क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में नया नेतृत्व शांति की राह चुनेगा या सख्त रुख जारी रखेगा, यह देखना अहम होगा।

क्या बदल सकती है विदेश नीति?

खामेनेई के दौर में ईरान ने पश्चिमी देशों के खिलाफ सख्त नीति अपनाई थी। अब सवाल उठ रहा है कि क्या नया सुप्रीम लीडर बातचीत और समझौते की राह अपनाएगा या मौजूदा रणनीति को ही आगे बढ़ाएगा। देश की आर्थिक स्थिति, प्रतिबंधों का असर और जनता की उम्मीदें-ये सभी बातें नए फैसलों को प्रभावित कर सकती हैं।

दुनिया की नजर तेहरान पर

ईरान में होने वाला हर बड़ा बदलाव वैश्विक बाजार और राजनीति पर असर डालता है। इसलिए नए सुप्रीम लीडर का चुनाव सिर्फ एक आंतरिक फैसला नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय महत्व का विषय है। आने वाले दिनों में परिषद का निर्णय यह तय करेगा कि देश किस दिशा में कदम बढ़ाएगा।

फिलहाल ईरान एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां से उसकी नई राजनीतिक कहानी शुरू होगी। नया चेहरा चाहे जो भी हो, उसके सामने देश को स्थिर रखना और बढ़ते तनाव के बीच संतुलन बनाना सबसे बड़ी परीक्षा होगी।

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