IRAN US War: ईरान की राजनीति में एक अहम बदलाव देखने को मिला है। देश के लंबे समय तक सर्वोच्च नेता रहे Ayatollah Ali Khamenei के निधन के बाद उनके बेटे Mojtaba Khamenei को नया सुप्रीम लीडर घोषित किया गया है। सोमवार सुबह ईरान के सरकारी टीवी चैनल ने इसकी पुष्टि की। इस घोषणा के साथ ही ईरान की सत्ता अब नई पीढ़ी के हाथों में जाती हुई दिखाई दे रही है।

मोजतबा खामेनेई की नियुक्ति अचानक नहीं मानी जा रही है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि पिछले कई सालों से उनका नाम संभावित उत्तराधिकारी के रूप में सामने आता रहा था। वह लंबे समय से देश की धार्मिक और राजनीतिक व्यवस्था के भीतर सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।
सत्ता के केंद्र के करीब रहे मोजतबा
56 वर्षीय मोजतबा खामेनेई भले ही सार्वजनिक मंचों पर कम दिखाई देते रहे हों, लेकिन सत्ता के अंदर उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती रही है। कई रिपोर्टों में उन्हें ऐसा व्यक्ति बताया गया है जो पर्दे के पीछे रहकर भी अहम फैसलों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं।
बताया जाता है कि अपने पिता Ayatollah Ali Khamenei के दफ्तर से जुड़े कई महत्वपूर्ण कामों में उनकी भूमिका रही है। इसी वजह से उन्हें सत्ता की कार्यप्रणाली और राजनीतिक समीकरणों की अच्छी समझ मानी जाती है।
धार्मिक दर्जा मिलने के बाद बढ़ी चर्चा
कुछ साल पहले उन्हें "अयातुल्ला" का धार्मिक दर्जा दिया गया था। ईरान में यह पद बहुत अहम माना जाता है और सुप्रीम लीडर बनने के लिए इसे जरूरी समझा जाता है।
जब उन्हें यह उपाधि मिली थी, उसी समय से कई विश्लेषकों ने संकेत दिया था कि उन्हें भविष्य में देश के सर्वोच्च पद के लिए तैयार किया जा रहा है। अब उनकी नियुक्ति के बाद उस समय की चर्चाएं काफी हद तक सही साबित होती दिखाई दे रही हैं।
अमेरिका की प्रतिक्रिया भी चर्चा में
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump पहले भी मोजतबा खामेनेई को लेकर टिप्पणी कर चुके हैं। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि ईरान में ऐसा नेतृत्व होना चाहिए जो क्षेत्र में शांति लाने की दिशा में काम करे।
हालांकि ईरान के अंदर कई शक्तिशाली समूहों ने मोजतबा के नेतृत्व का समर्थन किया है। खास तौर पर Islamic Revolutionary Guard Corps को ईरान की राजनीति और सुरक्षा व्यवस्था में बेहद प्रभावशाली माना जाता है।
चुनौती भरा होगा नया दौर
नए सुप्रीम लीडर के रूप में मोजतबा खामेनेई के सामने कई चुनौतियां होंगी। देश के अंदर राजनीतिक संतुलन बनाए रखना और बाहरी दबावों का सामना करना उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी होगी।
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि उनके नेतृत्व में ईरान की नीतियां किस दिशा में आगे बढ़ती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले महीनों में उनके फैसले क्षेत्र की राजनीति पर बड़ा असर डाल सकते हैं।
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