PM मोदी की आर्थिक सलाहकार परिषद के चेयरमैन Bibek Debroy का हुआ निधन, जानें उनके बारे में ये खास बातें

Bibek Debroy Death: प्रधानमंत्री मोदी की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष बिबेक देबरॉय और अर्थशास्त्री का आज 69 साल की उम्र में निधन हो गया। एम्स दिल्ली के अनुसार, उन्हें आंतों से जुड़ी बीमारी (इंटेस्टाइन इन्फेक्शन) था और सुबह करीब 7 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित श्री देबरॉय नीति आयोग के सदस्य रह चुके हैं। आइए आपको उनके जीवन की कुछ खास बातें बताते हैं।

Bibek Debroy

पीएम मोदी ने किया ये पोस्ट

पीएम मोदी ने X पर लिखा, "डॉ. बिबेक देबरॉय जी एक महान विद्वान थे, जो अर्थशास्त्र, इतिहास, संस्कृति, राजनीति, आध्यात्मिकता और अन्य विविध क्षेत्रों में पारंगत थे। अपने कार्यों से उन्होंने भारत के बौद्धिक परिदृश्य पर एक अमिट छाप छोड़ी। सार्वजनिक नीति में अपने योगदान के अलावा, उन्हें हमारे प्राचीन ग्रंथों पर काम करने और उन्हें युवाओं के लिए सुलभ बनाने में योगदान दिया। मैं डॉ. देबरॉय को कई सालों से जानता हूं। मैं उनकी अंतर्दृष्टि और जुनून को प्रेमपूर्वक याद रखूंगा। उनके निधन से दुखी हूं। उसके परिवार तथा मित्रों के लिए संवेदनाएं। ॐ शांति।"

बिबेक देबरॉय के जीवन से जुड़ी हैं ये खास बातें

1. दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, बिबेक देबरॉय साल 2015 में नीति आयोग के गठन से लेकर जून 2019 तक इसके पूर्णकालिक सदस्य भी थे। देबरॉय ने कई किताबें लिखी और संपादित कीं, जिनमें पुराणों, चार वेदों और 11 प्रमुख उपनिषदों के अनुवाद, पत्र और लोकप्रिय लेख शामिल हैं। वह द इंडियन एक्सप्रेस के कॉलमिस्ट भी थे।

2. बिबेक देबरॉय ने साल 1979 से 1984 तक कोलकाता के प्रेसीडेंसी कॉलेज में अपना करियर की शुरू किया। इसके बाद उन्होंने पुणे में गोखले इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिटिक्स एंड इकोनॉमिक्स जॉइन किया। यहां उन्होंने 1987 तक काम किया।

3. फिर बिबेक देबरॉय ने साल 1987 से 1993 तक उन्होंने दिल्ली में इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेन ट्रेड में जिम्मेदारी संभाली। 1993 में देबरॉय वित्त मंत्रालय और यूनाइटेड नेशंस डेवलपमेंट प्रोग्राम के एक प्रोजेक्ट के निदेशक बने। यह प्रोजेक्ट भारत के कानूनी सुधारों पर फोकस्ड था। वे 1998 तक निदेशक था।

4. उन्होंने इकॉनोमिक अफेयर्स में भी पढ़ाई पूरी की और साल 1995 से 1996 तक नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च और 1997 से 2005 तक उन्होंने राजीव गांधी इंस्टीट्यूट फॉर कंटेम्पररी स्टडीज में काम किया।

5. इतना ही नहीं, साल 2005 से 2006 तक उन्होंने पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री में जिम्मेदारी संभाली, फिर 2007 से 2015 तक सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च में काम किया। वे विभिन्न पुस्तकों और लेखों के लेखक और संपादक थे और कई समाचार पत्रों के सलाहकार/योगदान संपादक भी थे।

उनके टांस्लेशंस में महाभारत के 10 खंड, रामायण के 3 खंड और भागवत पुराण के 3 खंड भी शामिल थे। इतना ही नहीं, उन्होंने भगवद गीता और हरिवंश का भी ट्रांसलेशन किया था। वे कई न्यूजपेपर के सलाहकार या योगदान संपादक भी रहे हैं।

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