भारत के सबसे व्यस्त और दौड़ भाग वाले शहर के नाम से जाना जाने वाला हैदराबाद शहर है। भारत में 28 राज्य और 8 केंद्र शासित प्रदेश हैं मौजूदा समय में 27 राज्यों के पास उनकी राजधानी है लेकिन अपने आप में हैरान करने वाला सवाल ये है कि इतिहास में पहली बार ऐसा देखने को मिल रहा है जोकि आंध्र प्रदेश बिना राजधानी का राज्य है।
यह राज्य 2014 में विभाजन के बाद किए गए राजनीतिक और प्रशासनिक फैसलों से तैयार हुआ, जिस कारण तेलंगाना का निर्माण हुआ। शुरुआत में हैदराबाद को दस वर्षों के लिए दोनों राज्यों की साझा राजधानी के रूप में तय किया गया था।

साल 2024 में चंद्रबाबू नायडू की सरकार राज्य में दोबारा स्थापित होने के बाद एक बार फिर राजधानी के नाम ने चर्चा पकड़ ली है लेकिन अमरावती और विशाखापत्तनम के नाम का आधिकारिक ऐलान होना बाकी है।
हालांकि, आंध्र प्रदेश के नेतृत्व ने विभाजन के तुरंत बाद वेलागापुडी में एक अस्थायी सेटअप से काम करना शुरू कर दिया था। हैदराबाद को साझा करने की व्यवस्था 2 जून, 2024 को समाप्त हो गई, जिससे आंध्र प्रदेश बिना राजधानी के रह गया। राज्य की राजधानी जरूरी है क्योंकि इसमें विधायिका, कार्यकारी कार्यालय और न्यायपालिका जैसी प्राथमिक सरकारी संस्थाएं होती हैं।
तेलंगाना का गठन
संसद से 2014 में पारित विधेयक में आंध्र प्रदेश का पुनर्गठन होने के बाद 2 जून 2014 को तेलंगाना राज्य का गठन हुआ था, पिछले महीने तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने बैठक में अधिकारियों से कहा था वे 2 जून के बाद हैदराबाद में सरकारी गेस्ट हाउस लेक व्यू जैसी इमारतों को अपने कब्जे में लेने का कार्य समय से पूरा करें, जिन्हें 10 साल के समय के लिए आंध्र प्रदेश को दिया गया था।
अमरावती सपनों की राजधानी
कृष्णा नदी के किनारे गुंटूर जिले में मौजूद अमरावती को तत्कालीन मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने विभाजन के बाद आंध्र प्रदेश की राजधानी घोषित किया था। 2015 में चंद्रबाबू नायडू ने अनुमान लगाया था कि राज्य के लिए विश्व स्तरीय भविष्यवादी और स्मार्ट राजधानी बनाने के लिए 51,000 करोड़ रुपये की जरूरत होगी। उन्होंने किसानों से 33,000 एकड़ जमीन खरीदी और परियोजना के लिए सिंगापुर स्थित फर्मों को शामिल किया।
हालांकि, 2019 में चंद्रबाबू नायडू की तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) वाईएस जगन मोहन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) से चुनाव हार गई। रेवंत रेड्डी ने सभी चल रही परियोजनाओं को रोक दिया और अमरावती के लिए बजट कम कर दिया, जिससे इसके विकास में शामिल सिंगापुर की फर्मों को बाहर होना पड़ा। इसके बजाय उन्होंने आंध्र प्रदेश के लिए तीन राजधानी शहरों का प्रस्ताव रखा, एक योजना जिसे कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ा और वह सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई।
आंध्र प्रदेश
आंध्र प्रदेश के पास इस समय कोई भी स्थायी राजधानी नहीं है, लेकिन आपको पता होना चाहिए अदालतों में लंबे समय चल रही लड़ाई में अभी फैसला तय नहीं हुआ है। विभाजन के बाद भी आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बीच कई फैसलों पर खिंचातनी बनी हुई है। आंध्र प्रदेश की राजधानी को लेकर अभी कोई नाम सामने नहीं आया है।
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