Crypto vs Stock: क्रिप्टो करेंसी के भारत में ट्रेडिंग शुरु होने से समय से अबतक एक सवाल जो सबके मन में रहता है, वह यह है कि बेहतर रिटर्न के लिए क्रिप्टो और स्टॉक में से किसमें निवेश किया जाए। आज के समय में बहुत सारे लोग जोखिम लेकर पैसा कमाने की क्षमता रख रहे हैं। बाजार में निवेश को लेकर हर्षद मेहता वेब सीरीज का एक डॉयलाग बहुत फेमस हुआ था, 'रिस्क है तो इश्क है' यानी की ज्यादा रिस्क लेकर बेहतर मुनाफा बनाया जा सकता है। चलिए क्रिप्टो और स्टॉक मार्केट के रिस्क फैक्टर और कमाई की तुलना करते हैं।

क्रिप्टो में निवेश पर जोखिम, इक्विटी मार्केट की तुलना में काफी अधिक है। वास्तव में, क्रिप्टो आज के समय के सबसे जोखिम भरे निवेशों में से एक है। चलिए इन दोनों के कुछ पहलुओं पर गौर करते हैं।
रेगुलेशन
दुनिया भर में, इक्विटी बाजार नियम कानून के तहत रेगुलेटेड होते हैं। भारत में सेबी, संयुक्त राज्य अमेरिका में एसईसी और यूके में एफसीए इक्विटी बाजार के गतिविधियों पर नजर रखते हैं। ये एजेंसियां सुनिश्चित करती हैं कि खरीदारों और विक्रेताओं के बिच होने वाला ट्रांजेक्शन और यह ईकोसिस्टम सुचारू रूप से चलता रहे। इक्विटी बाजार रेगुलेटर नियम बनाते हैं जो निवेशकों को धोखा देने की कोशिश करने वालों पर कार्यवाही की जा सके।
दूसरी तरफ बात अगर क्रिप्टो की करें तो इसका कोई नियामक नहीं है। कई मौको पर इसमें फ्रॉड और क्रिप्टो माइनिंग की खबरे भी आई हैं, लेकिन कोई रेगुलेटर न होन की वजह से किसी पर आज तक कोई ठोस कार्यवाहीं नहीं हुई है।
उत्तरदायित्व और सीमा
इक्विटी बाजारों में यह बहुत स्पष्ट है कि नियामक की भूमिका क्या है, एक्सचेंज क्या कार्य करेगा, दलाल, निवेशक और अन्य सभी मध्यस्थों की क्या भूमिका है। यदि लेन-देन में कुछ गलत हो रहा है तो समस्या को ठीक करवाना बहुत हद तक आसाना है। इक्विटी में यदि धोखाधड़ी पाई जाती है तो लेन-देन को ट्रैक करके धोखेबाज को पकड़ा जा सकता है।
क्रिप्टो ब्लॉकचेन तकनीक के साथ किसी को भी लेनदेन को अधिकृत करता है लेकिन इसमें होने वाली अनियमितता के लिए उत्तरदायित्व और रेगुलेशन का आभाव है। क्रिप्टो में लेनदेन को कीसी भी तरह से अधिकृत नहीं किया जा सका है।

परेशानियों का निवारण
सेबी के पास उत्कृष्ट स्कोर तंत्र है जो निवेशकों को अपने लेनदेन में किसी भी अनियमितता को दूर करने की पूरी अनुमति देता है। शिकायत के आधार पर सेबी निवेशक की क्वेरी को हल करने का प्रयास करता है।
क्रिप्टो दुनिया में इस तरह की सुविधा वर्तमान में असंभव है। यदि किसी भी कारण से लेन-देन में कुछ गलत हो जाता है तो स्रोत को इंगित करना और उसे ठीक करना बहुत मुश्किल हो जाता है।
जोखिम का रेखे ख्याल
याद रखें कि कोई भी निवेश अपने स्वयं के जोखिम स्तर के साथ आते हैं, आपने जोखिम क्षमता और आपके निवेश के आधार पर आपको निवेश करना चाहिए।
कुल मिलाकर दोनों के जोखिम के अपने स्तर हैं। इक्विटी कंपनियों के व्यापार वृद्धि पर निर्भर करती है दूसरी ओर क्रिप्टोस के उतार चढ़ाव का कोई आधार नहीं है।
आपको निवेश करने से पहले हमेशा क्रिप्टो और इक्विटी के जोखिमों समेत अन्य पहलूओं पर ध्यान जरूर देना चाहिए।
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