
Silicon Valley Bank Crisis : सिलिकॉन वैली बैंक (एसवीबी) सैंटा क्लैरा, कैलिफ़ोर्निया में हेडक्वार्टर वाला एक कमर्शियल बैंक था। एसवीबी को आर्थिक संकट के कारण 10 मार्च, 2023 को बंद कर दिया गया। ये बंद होने के समय अमेरिका में 16वां सबसे बड़ा बैंक था। इसके डूबने का असर भारत के भी कुछ सेक्टरों पर पड़ने की संभावना जताई गयी है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि स्टार्टअप ईकोसिस्टम में सबसे बड़े वेंडर के तौर पर सिलिकॉन वैली बैंक के डूबने से भारतीय स्टार्टअप सेक्टर पर निगेटिव असर पड़ने की संभावना है। एसवीबी के डूबने ने इस सेक्टर में बहुत अनिश्चितता पैदा कर दी है।
आगे क्या होगी प्रोसेस
एसवीबी को कैलिफोर्निया डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल प्रोटेक्शन एंड इनोवेशन ने बंद कर दिया। इसने फेडरल डिपॉजिट इंश्योरेंस कॉरपोरेशन (एफडीआईसी) को रिसीवर नियुक्त किया है। एफडीआईसी के अनुसार 31 दिसंबर 2022 तक सिलिकॉन वैली बैंक की टोटल एसेट लगभग 209.0 अरब डॉलर और कुल डिपॉजिट में लगभग 175.4 अरब डॉलर थी। बैंक के बंद किए जाने के समय, इंश्योरेंस लिमिट से अधिक जमा राशि अनिर्धारित थी। अब एफडीआईशी बैंक और ग्राहकों से अतिरिक्त जानकारी प्राप्त करने के बाद अनइंश्योर्ड डिपॉजिट्स की संख्या तय करेगी।

स्टार्टअप सेक्टर चिंता में
जानकार मानते हैं कि सिलिकॉन वैली बैंक भारतीय स्टार्टअप का बड़ा सपोर्टर रहा है और इसने इसे बैंकिंग सेवाएं दी हैं। अमेरिका में बिजनेस करने वाले अधिकतर भारतीय स्टार्टअप इस बैंक का उपयोग करते हैं क्योंकि यह भारतीय बैंकों के साथ काम करने के इच्छुक चुनिंदा संस्थानों में से एक है। बहुत सारे बैंकिंग संस्थान विदेशी ग्राहकों के साथ काम नहीं करना चाहते हैं। इसके बंद होने से भारतीय कंपनियों को दिक्कत होगी।

बैंकिंग सेक्टर पर असर
बैंकरों और जानकारों का मानना है कि अमेरिका में एसवीबी के डूबने से भारतीय बैंकिंग सिस्टम पर कोई बड़ा प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है। भारतीय बैंकों पर इसका प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं है, क्योंकि भारतीय बैंक काफी बड़े हैं और इनके पास ऐसा एक्सपोजर नहीं है। इस समय भारतीय बैंक लेंडिंग रेशियो के मामले में बहुत सुरक्षित हैं। जहां तक इक्विटी मार्केट का मामला है, तो इस पर भी न्यूनतम प्रभाव होगा। जानकार मानते हैं कि दुनिया में होने वाली कोई भी बड़ी घटना दुनिया के हर बाजार को प्रभावित करती है, लेकिन लंबी अवधि में नहीं। हालांकि जानकार सावधान रहने को कह रहे हैं। निवेशक वैश्विक बैंकिंग सेक्टर पर सतर्क नजर रखे हुए हैं। माना जा रहा है कि भारत में बैंकों पर कोई बड़ा असर नहीं होगा, लेकिन निवेशक सतर्क हैं, जिसकी जरूरत भी है।
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