GST दरों में बदलाव का असर? खाली हो रहा है भारत सरकार का खजाना, ग्लोबल एजेंसी Moody's का बड़ा दावा

Tax Cut Impact: हाल में टैक्स में कटौती से रेवेन्यू ग्रोथ पर असर पड़ रहा है, जिससे भारत की फिस्कल हालत खराब हो रही है। इससे सरकार के पास पॉलिसी उपायों के जरिए इकॉनमी को सपोर्ट करने की कम गुंजाइश बची है। मूडीज रेटिंग्स ने मौजूदा फाइनेंशियल ईयर में कम कलेक्शन ने फिस्कल कंसोलिडेशन के रास्ते पर दबाव बढ़ा दिया है।

Tax Cut Impact

ग्लोबल एजेंसी ने क्या कहा?

एक वेबिनार में बोलते हुए मूडीज रेटिंग्स (Moody's) में सॉवरेन रिस्क के वाइस प्रेसिडेंट सीनियर क्रेडिट ऑफिसर, मार्टिन पेच ने कहा कि रेवेन्यू ग्रोथ काफी कमजोर रही है और फिस्कल कंसोलिडेशन के मामले में शायद कुछ रुकावटें हैं। हमने कुछ टैक्स कट भी देखे हैं और इसका भी रेवेन्यू ग्रोथ पर असर पड़ रहा है। इकॉनमी के लिए फिस्कल पॉलिसी सपोर्ट की शायद कम गुंजाइश है।

आम आदमी को मिली राहत!

सरकार ने लोगों की जेब में पैसे डालने के लिए टैक्स में कटौती की है। सस्ती हुई, खपत बढ़ाने की कोशिश हुई है लेकिन इसका असर देश के खजाने पर पड़ रहा है। बता दें कि इतनी बड़ी कमी आ गई कि अब अर्थव्यवस्था को इतनी बड़ी कमी आ गई कि अब अर्थव्यवस्था को में है।

देश के आम आदमी को राहत तो मिली लेकिन उसकी कीमत कहीं ज्यादा भारी पड़ती दिख रही है। ग्लोबल एजेंसी मूडीज रेटिंग्स ने एक बड़ी चेतावनी जारी की सरकार के इस वित्त वर्ष में किए गए टैक्स कटौती ने रेवेन्यू ग्रोथ पर सीधा असर डाला है और इससे अर्थव्यवस्था को मिलने वाला फिस्कल सपोर्ट सीमित हो सकता है।

मार्टिन पेच कहा कहना है कि इस समय सरकार के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ रेवेन्यू ग्रोथ उम्मीद से कमजोर है तो दूसरी तरफ टैक्स छूटों के कारण रेवेन्यू पर एक्स्ट्रा दबाव बन रहा है। उनके मुताबिक सरकार के लिए फिस्कल कंसोलिडेशन यानी घाटे को कम करने का रास्ता अब और मुश्किल हो सकता है।

सरकार पर बढ़ा कर्ज का बोझ?

कंट्रोलर जनरल ऑफ अकाउंट्स के ताजा आंकड़े के मुताबिक सितंबर तक केंद्र का नेट टैक्स रेवेन्यू 12.29 लाख करोड़ रहा जो पिछले साल की इसी अवधि ले 12.65 लाख करोड़ से कम है। यानी करीब 36,000 करोड़ रुपये की कमी को दिखाता है।

बजट अनुमान से कम कलेक्शन

इतना ही नहीं इस समय तक पूरे साल के बजट अनुमान का सिर्फ 43.3% टैक्स कलेक्शन ही हासिल हो पाया है। बल्कि पिछले वित्त वर्ष में ये आंकड़ा 49% था। यह साफ संकेत है कि रेवेन्यू बढ़ने की रफ्तार पिछले साल की तुलना में काफी धीमी है।

इनकम टैक्स और GST में कटौती

अब सरकार ने 2025-26 के बजट में इनकम टैक्स रिबेट को 7 लाख रुपये से बढ़ाकर 12 लाख रुपये कर दिया। इसका सीधा असर यह हुआ कि मिडिल क्लास को 1 लाख करोड़ रुपये की बड़ी टैक्स राहत मिली। इसके अलावा 22 सितंबर को करीब 375 सामानों पर GST रेट में कटौती की गई सामानों पर GST दरों में कटौती की गई हो गई।

हालांकि Moody's का मानना है कि महंगाई में नरमी और मॉनिटरी पॉलिसी में ढील देने से घरेलू मांग यानी घरेलू खपत को मजबूती मिलेगी।

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