
Thematic Funds and Sectoral Funds: आज के समय में निवेश के तमाम विकल्प उपलब्ध हैं। निवेशक भी अपने पैसों को निवेश करने के लिए कई सारे फंडो का चुनाव करते हैं। जानकारों के हिसाब से तमाम निवेश विकल्पो में सबसे सुरक्षित ऑप्शंस में से एक Mutual Funds है। यह भी कई प्रकार के होते हैं। जैसे मान लिजिए आप एक ही थीम वाले वाले अलग-अलग शेयरों में निवेश करना चाहते हैं, तो उन्हें थीमैटिक फंड्स (Thematic Funds) के नाम से जाना जाता है। वहीं अगर आप किसी विशेष इंडस्ट्री या सेक्टर के शेयरो में निवेश करना चाहते हैं, तो उसे सेक्टोरल फंड्स (Sectoral Funds) में निवेश करना कहा जाता है। चलिए आपको इन दोनो फंडो के विषय में विस्तार से बताते हैं।
क्या होते हैं Thematic Funds
जब आप किसी कॉमन थीम वाले फंड्स में निवेश करते हैं, तो उसे थीमैटिक फंड्स (Thematic Funds) में निवेश करना कहते हैं। इस कैटेगरी में हाउसिंग, टूरिज्म, मेक इन इंडिया जैसे फंड्स शामिल किए जा सकते हैं। मान लिजिए की अगर आप हाउसिंग थीम के फंड्स में निवेश करते हैं, तो इसमें सीमेंट, स्टील, पेंट, हाउसिंग फाइनेंस से जुड़ी कंपनियों में शामिल होंगी। इस तरह के फंड में निवेश करने के लिए टॉप-डाउन अप्रोच को फॉलो किया जाता है। निवेश करने वक्त टॉप-डाउन अप्रोच रखा जाता है, जिसमें अलग-अलग सेक्टर से एक ही थीम वाले फंड्स में निवेश किया जाता है.
क्या होते हैं Sectoral Fund
जब आप किसी स्पेशल इंडस्टी ग्रुप या सेक्टर से जुड़े शेयरों में निवेश करने वाले फंड में निवेश करते हैं तो, उन्हें सेक्टोरल फंड के नाम से जाना जाता है। इस तरह के फंड में निवेश करने का मतलब होता है कि आप उस सेक्टर में होने वाले ग्रोथ से पैसा कमाना चाहते हैं। इस तरह के फंड में अनुभवी निवेशकों को ही निवेश करना चाहिए।
थीमैटिक और सेक्टोरल फंड में अंतर
थीमैटिक फंड (Thematic Funds) में निवेश करने वाले इन्वेस्टर्स एक ही थीम वाले फंड में डायवर्सिफाइड निवेश करना पसंद करते हैं। वहीं अगर बात सेक्टोरल फंड (Sectoral Fund) की करें तो इसमे एक ही सेक्टर के अलग-अलग स्टॉक मे निवेश किया जाता है। थीमैटिक फंड में अलग-अलग सेक्टर के कॉम्बिनेशन में निवेश किया जाता है। सेक्टोरल में एक तरह के सेक्टर में ही निवेश किया जाता है।
इन बातों का रखे ध्यान
- ज्यादा जोखिम ज्यादा रिटर्न वाले फंड में निवेश करने से बचना चाहिए
- अनुभवी निवेशक के लिए रिस्क के साथ निवेश करना बेहतर होता है
- निवेशकों को फंड में एंट्री और एग्जिट की जानकारी जरूर होनी चाहिए
- 5-7 साल के लंबे निवेश से होगा बेहतर फायदा
- 10-15 प्रतिसत तक किया जा सकता है निवेश
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