Corporate और Bank FD में क्या है अंतर, कहां होगा ज्यादा फायदा, जानिए

नई दिल्ली, सितंबर 11। भारत में सावधि जमा (एफडी) हमेशा निवेश का पसंदीदा ऑप्श रहा है। चाहे वह शॉर्ट टर्म सेविंग हो, गारंटीड रिटर्न हो या कम रिस्क सेविंग मोड, एफडी हमेशा आम आदमी के लिए बेस्ट सेविंग इन्वेस्टमेंट विकल्पों में से एक उभर कर सामने आती है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से बैंक एफडी पर कम ब्याज दरें शॉर्ट टर्म निवेशकों के लिए चिंता का कारण बन गयी हैं और लोगों को हाई रिटर्न के लिए दूसरे विकल्पों पर विचार करने के लिए प्रेरित कर रही हैं। अगर आप भी ऐसे निवेशकों में से एक हैं, जो एफडी की ब्याज दरों में गिरावट के कारण चिंतित हैं, तो अब चिंता करने की जरूरत नहीं है। हम आपको एक और बेहतर विकल्प के बारे में बताएंगे जो है कॉर्पोरेट फिक्स्ड डिपॉजिट।

कॉर्पोरेट एफडी

कॉर्पोरेट एफडी

बैंक एफडी की तरह ही कई कंपनियां/कॉर्पोरेट और एनबीएफसी भी निश्चित अवधि के लिए पैसा जमा करती हैं और उस पर ब्याज देती हैं। इन कंपनियों और एनबीएफसी की सावधि जमा को कॉर्पोरेट एफडी के नाम से जाना जाता है। मगर फर्क यह है कि आम तौर पर बैंक एफडी के मुकाबले कॉर्पोरेट एफडी पर निवेशकों को अधिक ब्याज मिलता है।

कॉर्पोरेट एफडी, बैंक एफडी से क्यों है अलग

कॉर्पोरेट एफडी, बैंक एफडी से क्यों है अलग

कॉरपोरेट एफडी और बैंक एफडी के बीच सबसे महत्वपूर्ण अंतर यह है कि कॉरपोरेट एफडी ऊंची ब्याज दर की पेशकश की जाती है, जबकि बैंक एफडी अपने ग्राहकों को कम ब्याज दर देते हैं। दूसरा अंतर यह है कि बैंक एफडी की तुलना में आप कॉर्पोरेट एफडी में से कम समय में पैसा निकाल सकते हैं। मगर आरबीआई के दिशानिर्देशों के अनुसार यदि आप तीन महीनों की अवधि के भीतर एफडी से पैसा निकालते हैं, तो आपको इसके लिए जुर्माना देना होगा।

जोखिम रहता है बरकरार

जोखिम रहता है बरकरार

कॉर्पोरेट्स एफडी पर कोई भी वैधानिक गारंटी नहीं होती। कॉर्पोरेट एफडी खोलने का जोखिम मुख्य रूप से एफडी के ब्याज और निवेश राशि के पुनर्भुगतान के लिए कंपनी की वित्तीय क्षमता पर निर्भर करेगा। यानी अगर कंपनी कमजोर हालत में हुई तो आपको पैसा वापस पाने में दिक्कत होगी। जबकि बैंकों में आफका 5 लाख रु तक का पैसा सेफ है। क्योंकि कम से कम इतनी रकम का बीमा हुआ होता है।

किसके लिए सही कॉर्पोरेट एफडी

किसके लिए सही कॉर्पोरेट एफडी

विदेश में घूमने जाने के लिए, कार गिफ्ट में देने, जीवनसाथी के लिए कोई कीमती चीज खरीदने या किसी भी छोटी या फाइनेंशियल जरूरतों के लिए कॉर्पोरेट एफडी एक अच्छा विकल्प हो सकता है।

ब्याज दर का अंतर
जैसा कि हमने बताया बैंक एफडी पर कम ब्याज़ दर ऑफर करते हैं, लेकिन कॉर्पोरेट एफडी आपको हमेशा उच्च ब्याज़ दर प्रदान करेंगी। ये अंतर आम तौर पर 1 प्रतिशत से 4 प्रतिशत के बीच होता है।

किसे नहीं करना चाहिए निवेश

किसे नहीं करना चाहिए निवेश

कम जोखिम क्षमता वाले निवेशकों को कॉरपोरेट एफडी में पैसा लगाने से बचना चाहिए क्योंकि कॉरपोरेट/एनबीएफसी के डिफॉल्ट होने की स्थिति में आपका पैसा जमा बीमा कार्यक्रम के तहत कवर नहीं होता। ध्यान रहे कि अगर कॉर्पोरेट एफडी के तहत ब्याज के रूप में सालाना 5,000 रुपये से ज्यादा की आमदनी होती है तो उस पर इनकम टैक्स लगेगा।

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