PM Dhan Dhanya Krishi Yojana; Dalhan Aatmanirbharta Mission: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने पिछले 11 सालों में देश के किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में कई कदम उठाए हैं। इसके लिए कई तरह की योजनाएं चलाई गई हैं जिनमें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना भी शामिल है। अब किसानों की बेहतरी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को दो महत्वपूर्ण योजनाओं की शुरुआत की।
प्रधानमंत्री मोदी ने 11 अक्टूबर 2025 को नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष कृषि कार्यक्रम के दौरान पीएम कृषि धन-धान्य योजना और 'दालों में आत्मनिर्भरता मिशन (Mission for Aatmanirbharta in Pulses) की शुरुआत की। इस मिशन का उद्देश्य भारत को दाल उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना और आयात पर निर्भरता कम करना है।

ये दोनों योजनाएं किसानों को आत्मनिर्भर बनाने, उनकी आय बढ़ाने और खाद्यान्न उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई हैं। तो आइए विस्तार से जानते हैं इन योजनाओं के बारे में और साथ ही समझते हैं कि इन योजनाओं की खासियत और उद्देश्य क्या है... क्या इन दोनों योजनाओं के लागू होने से किसानों के लिए 'अच्छे दिन' आने वाले हैं...
पीएम धन-धान्य कृषि योजना क्या है?
पीएम धन-धान्य कृषि योजना कृषि क्षेत्र में धान और धन (चावल) उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है। इस योजना के तहत 24,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
इसका लक्ष्य कृषि उत्पादकता बढ़ाना, फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करना और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना है। इसके अलाव इस योजना का मुख्य उद्देश्य है किसानों को बेहतर बीज, उन्नत तकनीक और बाजार तक सीधे पहुंच प्रदान कर उनकी आय को दोगुना करना।
इस योजना के तहत किसानों को अनुदान और तकनीकी सहायता दी जाती है ताकि वे खेती के लिए नवीनतम कृषि उपकरणों और आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर सकें। इस योजना में सरकार के 36 योजनाओं को एक साथ जोड़ा जा रहा है। योजना के तहत कम उत्पादकता वाले 100 जिलों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जहां कृषि विकास के लिए लक्षित हस्तक्षेप किए जाएंगे।
पीएम धन-धान्य कृषि योजना के लिए तीन पैरामीटर्स पर किया गया 100 जिलों का चयन
पहला - खेत से पैदावार होने की क्षमता
दूसरा - एक खेत में कितनी बार खेती होती है
तीसरा - किसानों को लोन या निवेश की कितनी सुविधा है।
दलहन आत्मनिर्भरता मिशन क्या है?
दलहन आत्मनिर्भरता मिशन केंद्र सरकार की एक और महत्वपूर्ण पहल है जिसका उद्देश्य दलहन फसलों के उत्पादन में वृद्धि करना है। भारत विश्व का सबसे बड़ा दाल उत्पादक और उपभोक्ता देश है, लेकिन घरेलू मांग पूरी करने के लिए अब भी बड़ी मात्रा में आयात करना पड़ता है। इस स्थिति को बदलने के लिए केंद्र सरकार ने 2025-26 से 2030-31 तक चलने वाला 6 वर्ष का मिशन शुरू किया है, जिसकी कुल वित्तीय लागत ₹11,440 करोड़ रखी गई है।
इस मिशन के तहत किसानों को उन्नत बीज, बेहतर सिंचाई व्यवस्था, और कृषि उपकरण उपलब्ध कराए जाते हैं ताकि वे दलहन की खेती को बढ़ावा दे सकें। साथ ही इस योजना में किसानों को तकनीकी प्रशिक्षण भी दिया जाता है जिससे वे खेती के नए तरीकों को अपना सकें। मिशन का लक्ष्य है कि दलहन की उत्पादन क्षमता को अगले कुछ वर्षों में दोगुना किया जाए।
दलहन योजना का उद्देश्य
- अनुसंधान एवं विकास : उच्च उत्पादक, कीट-प्रतिरोधी और जलवायु सहनशील दाल किस्मों के विकास पर जोर दिया जाएगा।
- बीज वितरण : किसानों को 88 लाख प्रमाणित बीज किट निःशुल्क वितरित की जाएंगी, जिनकी निगरानी 'साथी पोर्टल' के माध्यम से की जाएगी।
- क्षेत्र विस्तार : अतिरिक्त 35 लाख हेक्टेयर भूमि को दाल उत्पादन के अंतर्गत लाया जाएगा।
- खरीद समर्थन : केंद्र सरकार की एजेंसियां जैसे NAFED और NCCF, पंजीकृत किसानों से अरहर, उड़द और मसूर की 100% उपज को अगले चार वर्षों तक न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदेंगी।
- इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास : देशभर में 1,000 प्रसंस्करण एवं पैकेजिंग इकाइयाँ सरकारी अनुदान के साथ स्थापित की जाएंगी।
- किसान संवाद : प्रधानमंत्री मोदी ने उन किसानों से भी संवाद किया जिन्होंने सरकारी योजनाओं के लाभ से दाल उत्पादन बढ़ाकर अपनी आय में सुधार किया है।
इन नई योजनाओं से आएंगे किसानों के 'अच्छे दिन'?
इन दोनों योजनाओं के सफल कार्यान्वयन से किसानों के जीवन में कई सकारात्मक बदलाव आने की संभावना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इन दोनों योनाओं के साथ कृषि और अन्य तरह के किसानों से जुडी दूसरी कई योजनाओं की शुरुआत की। इन योजनाओं के शुरु होने से किसानों को बेहतर बीज, तकनीक और बाजार तक सीधी पहुंच मिलेगी जिससे उत्पादन लागत कम होगी और उनकी उपज अधिक होगी। इससे उनकी आमदनी बढ़ेगी।
इसके अलावा दलहन आत्मनिर्भरता मिशन से दलहन की घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और किसानों को दलहन की फसलों पर निर्भरता कम होगी। नई कृषि तकनीकों और उपकरणों का इस्तेमाल करके किसान उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों बढ़ा पाएंगे।
किसानों से जुड़ी नई योजनाओं के शुरु होने से बिचौलियों का प्रभाव कम होगा। बाजार तक सीधी पहुंच से किसान अपने उत्पादों को उचित मूल्य पर बेच सकेंगे और बिचौलियों से मुक्ति मिलेगी और सबसे बड़ा फायदा बढ़े हुए उत्पादन से देश की खाद्यान्न सुरक्षा मजबूत होगी।
प्रधानमंत्री ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री मोदी ने नई योजनाओं की शुरुआत करते हुए कहा, "आज 11 अक्टूबर का ये दिन बहुत ही ऐतिहासिक है। आज नया इतिहास रचने वाले मां भारती के दो महान रत्नों की जन्म-जयंती है।" उन्होंने कहा, "भारत रत्न श्री जयप्रकाश नारायण जी और भारत रत्न श्री नानाजी देशमुख... ये दोनों ही महान सपूत ग्रामीण भारत की आवाज थे। लोकतंत्र के क्रांति के अगुआ थे। किसानों और गरीबों के कल्याण के लिए समर्पित थे।"
प्रधानमंत्री ने कहा, "आज इस ऐतिहासिक दिन, देश की आत्मनिर्भरता के लिए, किसानों के कल्याण के लिए दो महत्वपूर्ण योजनाओं की शुरुआत हो रही है। पहली, पीएम धन धान्य कृषि योजना और दूसरी, दलहन आत्मनिर्भरता मिशन। ये दोनों योजनाएं भारत के करोड़ों किसानों का भाग्य बदलने का काम करेगी। इन योजनाओं पर भारत सरकार करीब 35 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च करने वाली है।"
पीएम मोदी ने आगे कहा "खेती और किसानी हमेशा से हमारी विकास यात्रा की हिस्सा रही है। बहुत जरूरी होता है कि बदलते समय के साथ खेती-किसानी को सरकार का सहयोग मिलता रहे, लेकिन दुर्भाग्य से पहले की सरकारों ने खेती-किसानी को अपने हाल पर छोड़ दिया था। इसलिए भारत की कृषि व्यवस्था लगातार कमजोर होती जा रही थी। 21वीं सदी के भारत को तेज विकास के लिए अपनी कृषि व्यवस्था में भी सुधार करना आवश्यक था और इसकी शुरुआत 2014 के बाद से हुई।"
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बीते 11 वर्षों में भारत का कृषि निर्यात करीब करीब दोगुना हो गया है। अनाज उत्पादन करीब करीब 900 लाख मीट्रिक टन और बढ़ गया। फल और सब्जियों का उत्पादन 640 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा बढ़ गया। आज दूध उत्पादन में भारत नंबर वन है। हमने किसानों के हित में... बीज से लेकर बाज़ार तक reform किए, सुधार किए।
उन्होंने आगे कहा कि हमें विकसित बनना है तो हर क्षेत्र में लगातार बेहतर करते ही रहना होगा, सुधार करते ही रहना होगा। इसी सोच का परिणाम है- पीएम धन धान्य कृषि योजना और इस योजना की प्रेरणा बनी है - आकांक्षी जिला योजना की सफलता। पहले की सरकारों ने देश के 100 से अधिक जिलों को पिछड़ा घोषित करके भूल गई थी। हमने उन जिलों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया और उनको आकांक्षी जिला घोषित किया।
प्रधानमंत्री ने कहा, "कांग्रेस सरकार ने अपने 10 साल में खाद पर 5 लाख करोड़ रुपए की सब्सिडी दी थी। हमारी सरकार ने पिछले 10 साल में खाद पर 13 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की सब्सिडी दी है। कांग्रेस सरकार एक साल में खेती पर जितना खर्च करती थी, उतना तो बीजेपी, एनडीए की सरकार एक बार में पीएम किसान सम्मान निधि के रुप में किसानों के बैंक खाते में जमा कर देती है। अब तक 3 लाख 75 हजार करोड़ रुपए सीधे पीएम किसान सम्मान निधि से आपके खातों में भेजे जा चुके हैं।"
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