IPO: आज के समय में आपने कहीं न कहीं इनिशियल पब्लिक आफरिंग (आईपीओ) का नाम जरुर ही सुना होगा लेकिन क्या आप जानते हैं आईपीओ क्या होता है और इसमें निवेश कैसे किया जाता है और इसके फायदे क्या होते है? अगर नहीं तो फिर आज की यह खबर आपके बहुत काम की हो सकती हैं। आज हम आपको इसी की जानकारी दे रहें हैं तो फिर आइए जानते हैं इसके बारे में।

जानिए क्या है आईपीओ
जब कोई कंपनी पहली बार पब्लिक को अपने शेयर ऑफर करती है तो इसे इनिशियल पब्लिक आफरिंग (आईपीओ) कहते हैं। मालूम हो कि देश में कई प्राइवेट कंपनियां अलग-अलग क्षेत्रों में काम करती हैं।
ये कंपनियां अक्सर अपने फंड की कमी को पूरा करने के लिए शेयर बाजार में खुद को लिस्ट करवाती हैं। द इकोनोमिक टाइम्स हिंदी की एक खबर के मुताबिक, आईपीओ को एक बार जारी करने के बाद शेयर बाजार में कंपनी लिस्ट हो जाती है। निवेशक इसके बाद ही उसके शेयर की खरीद-फरोख्त कर सकते हैं। जो व्यक्ति आईपीओ खरीदता है उसकी कंपनी में हिस्सेदारी हो जाती है।
कंपनी निवेशकों से आए जुटाए गए फंड को अपने उत्पादन, इंफ्रास्टक्टर और अन्य कार्यों पर खर्च करती है। कोई कंपनी अगर आईपीओ ला रही है तो उसे रेग्युलेटर सेबी के नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है।
क्या है आईपीओ में निवेश का तरीका
आईपीओ में निवेश करने के लिए आपके पास डीमैट खाता होना चाहिए। आप किसी भी ब्रोकिंग फर्म के जरिए डीमैट खाता खोल सकते हैं। आईपीओ जारी करने वाली कंपनी आईपीओ को निवेशकों के लिए 3 दिन से 10 दिन के लिए खोलती है।
निवेशक उतनी ही तय अवधि में ब्रोकरेज फर्म की सहायता से आईपीओ में निवेश कर सकते हैं। आईपीओ में निवेश करने के बाद अलॉटमेंट की बात आती है।
शेयर अलॉटमेंट
जब आईपीओ बंद हो जाता है तो फिर इसके बाद सभी बिड्स का असेसमेंट किया जाता है। अगर कोई बिड अवैध होती है तो शेयर अलॉट नहीं होता। किसी आईपीओ को कुल जारी शेयर के मुकाबले कम शेयरों या उतने ही शेयरों की बोली मिलती है तो सभी इंवेस्टर्स को बोली के अनुसार शेयर अलॉट हो जाते हैं। जब कोई आईपीओ ओवर सब्सक्राइब्ड हो जाता है तो शेयरों का अलॉटमेंट प्रो-राटा बेस पर होता है। ऐसे में ये आपकी बिड से कम भी हो सकते हैं।
इस बातों का ध्यान रखना बेहद जरुरी
आप जिस कंपनी का आईपीओ खरीद रहे हैं आपको सबसे पहले उस कंपनी के बारे में बेहतर जानकारी होनी चाहिए। अगर आप पहली बार आईपीओ में निवेश करने जा रहे हैं तो आप अपने व्यक्तिगत वित्तीय सलाहकार से बात जरुर करें।
आईपीओ लाने से पहले कंपनी सेबी के पास आवेदन के दौरान कुछ डाक्यूमेंट जमा कराती है। इसे ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रोस्पेक्टस कहते हैं आपको निवेश से पहले इसे ध्यान से पढ़ लें।
जब तक आईपीओ में आपको शेयर अलॉट नहीं हो जाते तब तक अकाउंट में उतनी राशि ब्लॉक रहती है। एक रिटेल इन्वेस्टर एक बार में 2 लाख तक का निवेश ही इनिशियल पब्लिक आफरिंग (आईपीओ) में कर सकता है।
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