Old Note : क्या जो पुराने पांच सौ रूपये और एक हजार रूपये के जो नोट है। उसको बदलने का मौका मिल सकता है। यह जो सवाल है आपको हैरान करें आप यह सोचेंगे और नोट बंदी को 6 वर्ष हो गए है। अब यह कैसे संभव हो सकता है। मगर जो सुप्रीम कोर्ट को सुनवाई है उसको देखे तो यह असंभव नहीं हैं। शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने जो नोटबंदी को चुनौती देने वाली जो याचिकाएं है उसकी सुनवाई के दौरान के बयान दिया है। सुप्रीम कोर्ट की तरफ से यह कहा गया है की रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) को वो जो व्यक्ति है। उन व्यक्तियों के द्वारा दिए गए जो वास्तविक आवेदनों पर विचार करना चाहिए। जो पुरानी करेंसी नोटों की जो बदलने की समय सीमा थी। उससे चूक गए हैं।
विचार हो सकता है कुछ मामलों में
पांच जजों की जो बेच है। वे पांच सौ रूपये और एक हजार रूपये की जो पुरानी होते है उसको विमुद्रीकरण करने की जो 8 नवंबर की जो वैधता है। उसपर विचार कर रहे है। लाइव लॉ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश के अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणि की तरफ से कहा गया है कि विमुद्रीकृत नोटों को बदलने की जो तारीखे है उस पर विस्तार नहीं किया जा सकता। मगर आरबीआई आवेदकों द्वारा जरूरी शर्ते हैं उसको पूरी करने और केंद्रीय बैंक की संतुष्टि वाले कुछ व्यक्तिगत मामलो पर विचार करेगा। वेंकटरमणि आरबीआई के पास जो 700 आवेदन आय है उस पर बात कर रहे थे।
कोई मतलब नहीं अब इन याचिकाओं का
कोर्ट में जो अटॉर्नी जनरल है। उन्होंने नोटबंदी की जो अधिसूचना है उसका बचाव किया। अटॉर्नी जनरल ने कहा कि जो नोटबंदी थी। उसको जाली नोटों की जो समस्या है। उसके कारण और काला धन की समस्या की वजह से लागू किया गया था। सरकार के मुताबिक, जो नोटबंदी है उसको आरबीआई के कानून 1934 के नियमों के तहत लागू किया गया था। सरकार का यह कहना है कि 6 वर्षो के बाद याचिकाओं में विचार करना। एक शैक्षणिक कवायद है। इस कोई भी मतलब नहीं रह गया हैं।
याचिकाकर्ता क्या कह रहे है
बहुत सारे याचिकाकर्ता है जो नोटबंदी को चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट नोटबंदी को चुनौती देने बहुत सारी याचिकाएं है उस पर सुनवाई कर रहा है। इनमे यह कहा गया है कि इनके पास बहुत सारे पुराने नोट है जो रखे हुए हैं। वहीं एक याचिका कर्ता का यह कहना है कि उनके पास 1 करोड़ रुपया से भी अधिक के पुराने नोट रखे हुए है। इस पर कोर्ट की तरफ से कहा गया है कि आपके पास जो पुराने नोट है उसको संभाल कर रखिए।


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