नयी दिल्ली। ज्यादातर लोगों को उम्मीद थी कि सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय की तरफ से सोमवार को चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के आंकड़े में गिरावट आएगी। हालांकि व्यापक सहमति यह थी कि गिरावट 20% से अधिक नहीं होगा। मगर पहली तिमाही में जीडीपी में 23.9 फीसदी की गिरावट आई। दूसरे शब्दों में इस साल अप्रैल-जून तिमाही में भारत में उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं का कुल मूल्य पिछले साल के तीन महीनों में उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के कुल मूल्य से 23.9 फीसदी कम रहा। इससे भी खराब स्थिति यह है कि लॉकडाउन के कारण प्राप्त डेटा सटीक नहीं है और अधिकांश विश्लेषकों को यह उम्मीद है कि संशोधन होने पर ये आंकड़े और घटेंगे।
पूरे साल के आंकड़े और खराब रहेंगे
जीडीपी में विश्लेषकों की उम्मीद से ज्यादा गिरावट आई है। ऐसे में माना जा रहा है कि पूरे वर्ष के जीडीपी के आंकड़े भी खराब रह सकते हैं। एक अनुमान के अनुसार वित्त वर्ष 2020-21 में जीडीपी 7 फीसदी घट सकती है। 1990 के दशक की शुरुआत में आर्थिक उदारीकरण के बाद से भारतीय अर्थव्यवस्था ने हर साल औसतन 7 फीसदी जीडीपी वृद्धि दर्ज की है। इस साल इसमें 7 फीसदी गिरावट आ सकती है।
कैसा रहा अलग-अलग सेक्टरों का हाल
अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों के योजित सकल मूल्य (जीवीए) के संदर्भ में डेटा से पता चलता है कि कृषि को छोड़कर, जिसमें 3.4 फीसदी जीवीए की वृद्धि हुई, अर्थव्यवस्था के अन्य सभी सेक्टरों के राजस्व में गिरावट देखी आई। सबसे ज्यादा प्रभावित सेक्टर निर्माण (-50%), व्यापार, होटल और अन्य सेवाएं (-47%), विनिर्माण (-39%) और खनन (-23%) रहे। ध्यान देने वाली बात ये है कि ये ऐसे सेक्टर हैं जो देश में सबसे ज्यादा नई नौकरियों के अवसर प्रदान करते हैं। ऐसे में इन सेक्टरों में इतनी तेज गिरावट का मतलब है कि इनका उत्पादन और आय घटना। इससे या अधिक लोगों की नौकरियों जाएंगी या फिर बेरोजगारी में वृद्धि होगी।
क्यों आई जीडीपी में गिरावट
किसी अर्थव्यवस्था में माल और सेवाओं की कुल मांग, जो कि जीडीपी है, विकास के चार इंजनों में से एक से उत्पन्न होती है। सबसे बड़ा इंजन आपके जैसे निजी व्यक्तियों की मांग की खपत है। इसे अ मान लीजिए। भारतीय अर्थव्यवस्था में इसका सकल घरेलू उत्पाद में 56.4% योगदान होता है। दूसरा सबसे बड़ा इंजन निजी क्षेत्र के व्यवसायों द्वारा उत्पन्न मांग है। इसे ब मान लीजिए। इसका जीडीपी में 32% हिस्सा है। तीसरा इंजन सरकार द्वारा उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं की मांग है। इसे स मान लीजिए। भारत की जीडीपी में इसकी 11 फीसदी हिस्सेदारी है। अंतिम इंजन भारत के निर्यात से आयात घटाने के बाद जीडीपी में शुद्ध मांग है। इसे द मानिए। भारत के मामले में, यह सबसे छोटा इंजन है। क्योंकि भारत आम तौर पर निर्यात से अधिक आयात करता है, इसलिए इसका प्रभाव जीडीपी पर नकारात्मक है। इन चारों इंजनों को जोड़ कर जीडीपी बनती है।
क्या गिरा क्या बढ़ा
इनमें निजी खपत और व्यापारों की तरफ से निवेश में भारी गिरावट आई है। हालांकि भारत का आयात प्रभावित हुआ है इसलिए 'द' में बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा सरकारी खर्च में 16 फीसदी की बढ़ोतरी हुई, मगर बाकी सेक्टरों में हुए नुकसान की भरपाई नहीं की जा सकती। शुद्ध नतीजा यह है कि कागज पर जीडीपी में सरकारी खर्च का हिस्सा 11% से 18% हो गया है, फिर भी वास्तविकता यह है कि कुल जीडीपी में 24% की गिरावट आई है।
क्या है इससे निकलने का रास्ता
जब इनकम में तेजी से गिरावट आती है, तो निजी व्यक्ति खपत में कटौती करते हैं। जब खपत गिरती है तो कारोबार निवेश करना बंद कर देते हैं। अब ये दोनों स्वैच्छिक निर्णय हैं, इसलिए लोगों को खपत या कारोबारों से अधिक निवेश कराने के लिए कोई तरीका नहीं है। ऐसे में केवल एक इंजन है जो जीडीपी को बढ़ावा दे सकता है और वह है सरकार। सरकार जब अधिक खर्च करती है (सड़कों और पुलों का निर्माण करके, वेतन का भुगतान करके या सीधे पैसा सौंपकर) तो अर्थव्यवस्था पटरी पर आ सकती है। यदि सरकार पर्याप्त खर्च नहीं करती है तो अर्थव्यवस्था को ठीक होने में लंबा समय लगेगा।
More From GoodReturns

भारी बारिश का अलर्ट: बाढ़ में डूबी कार को स्टार्ट न करें, क्लेम पाने का सही तरीका जानें

Manipal Health IPO: ₹9,275 करोड़ का बड़ा दांव, क्या आपको अप्लाई करना चाहिए?

ITR फाइल करने का आज आखिरी मौका: क्या आज के बाद लगेगा जुर्माना? जानें बचने का तरीका

US Fed का फैसला आज रात: क्या भारतीय बाजार में आएगी बड़ी हलचल? जानें ट्रेडर्स के लिए खास रणनीति

GST QRMP स्कीम: PMT-06 पेमेंट में 35% चालान चुनें या सेल्फ-असेसमेंट? ब्याज से बचने का पूरा गणित

ITR फाइलिंग की डेडलाइन: 31 जुलाई से पहले निपटा लें ये जरूरी काम, वरना होगा नुकसान

चेन्नई रेल अपडेट: आज रात कई ट्रेनें रद्द, सफर से पहले चेक करें अपना रूट और टाइमिंग

Russia ने 6 महीने में बेच दिया 44 टन सोना! रूस क्यों घटा रहा है अपना Gold Reserve?

Indo-MIM Listing Today: आज बाजार में होगी धमाकेदार एंट्री! लिस्टिंग के बाद शेयर बेचने का सही तरीका

मुंबई बारिश अलर्ट: बैंकिंग ठप होने पर पैसे की किल्लत से कैसे बचें? जानें स्मार्ट तरीके

Gold Outlook: Buy on Dip या Sell on Rise? गोल्ड, सिल्वर और क्रूड पर Expert Strategy!



Click it and Unblock the Notifications