क्या होते हैं Target Maturity Funds, क्या हैं इनके फायदे, जानिए सबकुछ
target maturity funds

Target Maturity Funds : टारगेट मैच्योरिटी फंड (टीएमएफ) डेब्ट म्यूचुअल फंड स्कीम होती हैं जो इक्विटी इंडेक्स फंड के जैसी होती हैं। हालाँकि इनमें एक बड़ा अंतर है, क्योंकि ये फंड एक अंडरलाइंग बॉन्ड इंडेक्स को ट्रैक करते हैं। इस तरह इन योजनाओं को डेब्ट फंडों में एक पैसिव निवेश ऑप्शन बना दिया गया है। जैसा कि नाम में 'टारगेट' शब्द शामिल है, तो समझा जा सकता है कि टीएमएफ के पोर्टफोलियो में ऐसे बॉन्ड होते हैं जो तय मैच्योरिटी डेट्स वाले अंडरलाइंग बॉन्ड इंडेक्स का हिस्सा होते हैं। पोर्टफोलियो के बॉन्ड मैच्योरिटी तक रखे जाते हैं और होल्डिंग अवधि के दौरान भुगतान किए गए ब्याज को फंड में फिर से निवेश कर दिया जाता है।

मैच्योरिटी पर क्या होता है

मैच्योरिटी पर क्या होता है

मैच्योरिटी के समय, टारगेट मैच्योरिटी फंड की यूनिट रखने वाले निवेशकों को मूल पैसा और मिलने वाला ब्याज दिया जाता है। टीएमएफ ओपन-एंडेड स्कीमें होती हैं जो एक्सचेंज ट्रेडेड फंड या इंडेक्स फंड में से कोई एक हो सकती हैं। इस तरह इनके पास लिक्विडी भी काफी अधिक होती है।

टारगेट मैच्योरिटी फंड कैसे काम करते हैं?

टारगेट मैच्योरिटी फंड कैसे काम करते हैं?

टारगेट मैच्योरिटी फंड का पोर्टफोलियो बॉन्ड के समान ही होता है, यानी पोर्टफोलियो में रखे गए बॉन्डों की लगभग समान मैच्योरिटी डेट होती है, जो कि फंडी की घोषित मैच्योरिटी डेट ही होती है। मैच्योर होने तक बॉन्ड को होल्ड रखने से, फंड की अवधि बीतते समय के साथ कम होती जाती है और इसलिए निवेशकों को ब्याज दर में बदलाव के कारण कीमतों में उतार-चढ़ाव का खतरा कम होता है।

फंड कम करते हैं बॉन्ड की मैच्योरिटी
ये फंड होल्डिंग बॉन्ड की मैच्योरिटी को कम करते (रोल डाउन) हैं। रोल डाउन का मतलब है, बॉन्ड पोर्टफोलियो की मैच्योरिटी या समय के साथ कम हो जाती है। उदाहरण के लिए यदि 5 साल का बॉन्ड मैच्योरिटी तक रखा जाता है, तो एक साल के बाद यह 5 साल का बॉन्ड 4 साल का रह जाता है, दो साल के बाद यह 3 साल का रह जाता है और आगे इसी तरह अवधि कम होती रहती है।

कब मिलता है अधिक फायदा

कब मिलता है अधिक फायदा

यदि आप मैच्योरिटी को कम करते हैं, तो इन फंड्स से मिलने वाली यील्ड ऊंची बनी रहती है, फिर भले ही पोर्टफोलियो का जोखिम मैच्योरिटी या अवधि के कम होने के साथ घटता रहे। इस ऑप्शन में मैच्योरिटी अधिक होने पर यील्ड अधिक होती है। लेकिन ब्याज दर जोखिम सीधे मैच्योरिटी या बॉन्डड की अवधि से जुड़ा हुआ है। यही खासियत टारगेट मैच्योरिटी फंड को एक अच्छा निवेश ऑप्शन बनाता है, खासकर जब ब्याज दरें अधिक होती हैं और भविष्य में उनके कम घटने की संभवाना रहती है।

Mutual Fund: में कैसे करें invest, किन बातों का रखें ध्यान, ये है सही तरीका | Good Returns
ये हैं तीन बड़े फायदे

ये हैं तीन बड़े फायदे

- ओपन-एंडेड होने के कारण यह फंड काफी लिक्विड हैं। इनकी यूनिट्स को आसानी से ट्रेडिंग स्टॉक के रूप में स्टॉक एक्सचेंज पर रिडीम या बेचा जा सकता है
- लॉक-इन यील्ड्स, ब्याज दरों में बदलाव के बावजूद, टीएमएफ का पोर्टफोलियो मैच्योरिटी डेट के अनुसार ही रहेगा। इसलिए, यदि यूनिट्स मैच्योरिटी तक रखी जाती हैं तो निवेशक को निश्चित रूप से बताई गयी यील्ड/ब्याज दर दी जाएगी।
- टैक्स बेनेफिट केवल तभी मिलेगा, जब मैच्योरिटी बेनेफिट डेब्ट 3 वर्ष से अधिक हो

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