Whale Vomit Price : दुनिया में आपको कई ऐसी चीजें दिख जाएंगी, जो देखने में घिनोनी हो सकती हैं। पर उनकी कीमत काफी होती है। ऐसी ही एक चीज है व्हेल की उल्टी। आप सोचेंगे कि भला किसी जीव की उल्टी इतनी कीमती कैसे हो सकती है? तो बता दें कि व्हेल की उल्टी, जिसे साइंटिफिक भाषा में एम्बरग्रीस कहा जाता है, एक खास पदार्थ है। इसका इस्तमाल कुछ अहम चीजों में किया जाता है। इसीलिए इसकी कीमत करोड़ों में होती है। इसे बहता हुआ गोल्ड या बहता हुआ खजाना भी कहा जाता है। आगे जानिए इसके बारे में विस्तार से।

ऐसे होती है तैयार
एम्बरग्रीस को केवल शुक्राणु व्हेल तैयार कर सकता है। इसे एक अजीब प्राकृतिक घटना भी माना जाता है। दिखने में एम्बरग्रीस एक मोमी मगर ठोस पदार्थ होता है। ये ज्वलनशील होती है। ये शुक्राणु व्हेल की आंतों में तैयार होता है। जहां तक इस्तेमाल की बात है तो इत्र और दवाओं में व्हेल की उल्टी काम आती है। ये एक चीज है जिसका इस्तेमाल हाल फिलहाल से नहीं बल्कि सदियों से हो रहा है।
जानिए तैयार होने का प्रोसेस
जब कोई व्हेल एक वसायुक्त, कोलेस्ट्रॉल वाले पदार्थ को बनाता है तो यह डिफेंस और कोट की तरह काम करता है। ये शुक्राणु व्हेल जिन्हें खाता है (जैसे स्क्वीड और कटलफिश की चोंच) उनके जो बचे-खुचे भाग होते हैं उनके इर्द-गिर्द बनता है। एम्बरग्रीस उसकी आंतों की परसों को इस बिना पचे खाने से होने वाले नुकसान से बचाता है और व्हेल के पेट से निकलता है। साथ ही खुद भी बाहर आ जाता है।

क्या है वैज्ञानिकों का अनुमान
वैसे तो वैज्ञानिकों के पास सटीक जवाब नहीं है कि व्हेल के शरीर में एम्बरग्रीस का उत्पादन क्यों होता है। पर कुछ अनुमानों के आधार पर कहा जाता है कि ये व्हेल के जठरांत्र संबंधी मार्ग द्वारा कठोर, शार्प वस्तुओं के रास्ते को आसान बनाने के लिए जनरेट होता है जिसे उसने खाया हो सकता है। जैसे कि उसने कोई ऐसी चीज खाई जो पेट या आंतों को काट सकती है तो उसके आस-पास एम्बरग्रीस बन जाती है ताकि वो बाहर आए।
करोड़ों में होती है कीमत
एम्बरग्रीस बेहद मूल्यवान होती है। इसकी कीमत सोने की तुलना में भी अधिक है। ऐसा इसलिए है क्योंकि यह फाइन परफ्यूम में फिक्सेटिव और इंग्रेडिएंट के रूप में इस्तेमला होती है, जो इसे अत्यधिक बेशकीमती बनाता है। कहा जाता है कि व्हेल की उल्टी सुगंध को लंबे समय तक बरकरार रखती है।

भारत में बिक्री प्रतिबंधित
तैरता हुआ ये सोना समुद्र में अपना रास्ता खोजने से पहले दशकों तक समुद्र में बहता रहता है। वैज्ञानिकों को लगता है कि शुक्राणु व्हेल एम्बरग्रीस का उत्पादन कठोर और तेज वस्तुओं को खाने के लिए करती है ताकि वे व्हेल की आंतों को नुकसान न पहुंचाएं। एम्बरग्रीस के अंदर पाई जाने वाली ऐसी नुकीली वस्तुओं में विशाल स्क्वीड के दांत शामिल हैं। बता दें कि भारत में, एम्बरग्रीस की बिक्री कानून द्वारा प्रतिबंधित है क्योंकि स्पर्म व्हेल एक लुप्तप्राय प्रजाति है जो वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित है। स्पर्म व्हेल को 1970 में एक लुप्तप्राय प्रजाति घोषित किया गया था।
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