DA Hike: पश्चिम बंगाल सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अंतरिम बजट पेश करते हुए कई अहम घोषणाएं की हैं। करीब 4.06 लाख करोड़ रुपए के इस बजट में सरकार ने साफ संकेत दिया है कि उसका फोकस आम लोगों की जेब, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा पर है।

वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने विधानसभा में बजट पेश करते हुए राज्य कर्मचारियों, महिलाओं, युवाओं और जमीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मियों को राहत देने वाले फैसलों का ऐलान किया।
DA बढ़ोतरी से कर्मचारियों को राहत
राज्य सरकार ने महंगाई भत्ता यानी DA बढ़ाने की घोषणा की है। लंबे समय से कर्मचारी बढ़ती महंगाई के कारण वेतन में राहत की मांग कर रहे थे। डीए बढ़ने से कर्मचारियों की मासिक आय में सुधार होगा और रोजमर्रा के खर्च संभालना थोड़ा आसान होगा। माना जा रहा है कि यह फैसला कर्मचारियों के बीच भरोसा बढ़ाने वाला साबित हो सकता है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का असर
आज सुप्रीम कोर्ट का एक अहम आदेश भी सामने आया। अदालत ने राज्य सरकार को 2008 से 2019 के बीच कर्मचारियों के बकाया डीए का भुगतान करने को कहा है। कोर्ट ने साफ किया कि डीए कर्मचारियों का कानूनी हक है। सरकार को 6 मार्च तक बकाया राशि का 25 फीसदी हिस्सा देने का निर्देश मिला है। इस फैसले के बाद डीए को लेकर माहौल और गर्म हो गया है।
महिलाओं के लिए लक्ष्मीर भंडार में बढ़ोतरी
महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए चलाई जा रही 'लक्ष्मीर भंडार' योजना को और मजबूत किया गया है। सरकार ने घोषणा की है कि फरवरी से इस योजना के तहत मिलने वाली मासिक राशि में 500 रुपए की बढ़ोतरी होगी। इससे राज्य की लाखों महिलाओं को सीधा फायदा मिलेगा और घर के खर्च में मदद मिलेगी।
बेरोजगार युवाओं के लिए नई योजना
युवाओं के लिए सरकार ने 'बांग्लार युवा साथी' नाम से नई योजना की शुरुआत की है। इसके तहत 21 से 40 साल के बेरोजगार युवाओं को हर महीने 1,500 रुपए की सहायता दी जाएगी। यह मदद नौकरी मिलने तक या अधिकतम पांच साल तक जारी रहेगी। सरकार का मानना है कि इससे युवाओं को आत्मनिर्भर बनने में सहारा मिलेगा।
आशा और आंगनवाड़ी कर्मियों का मानदेय बढ़ा
आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में भी 1,000 रुपए की बढ़ोतरी की घोषणा की गई है। ये कर्मी गांव और शहरों में स्वास्थ्य और पोषण सर्विसों की रीढ़ माने जाते हैं। मानदेय बढ़ने से उनका मनोबल बढ़ेगा।
चुनाव से पहले बजट का संदेश
अप्रैल-मई में संभावित विधानसभा चुनावों से पहले आए इस अंतरिम बजट को सामाजिक संतुलन बनाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। कर्मचारियों, महिलाओं और युवाओं के लिए की गई घोषणाएं साफ दिखाती हैं कि सरकार हर वर्ग को साधने की रणनीति पर काम कर रही है। यह बजट आने वाले समय में राज्य की राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों को दिशा दे सकता है।


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